
नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर केंद्र सरकार की चुप्पी को तीखे शब्दों में आलोचना की है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में हुई इस घटना पर सरकार का मौन तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से भागना है, उन्होंने कहा।
भारत ने न तो ईरान की संप्रभुता भंग की निंदा की और न ही इस लक्षित हत्या पर कोई स्पष्ट बयान दिया। सोनिया ने पश्चिम एशिया संकट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणियों का हवाला देते हुए बताया कि उन्होंने अमेरिका-इजरायल के क्रूर हमलों को नजरअंदाज कर यूएई पर ईरान के जवाबी प्रहार की ही भर्त्सना की। बाद में ‘गहरी चिंता’ और ‘संवाद’ की खोखली बातें कीं।
यह हत्या बिना युद्ध घोषणा के और कूटनीतिक प्रक्रिया के बीच हुई, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन है। सोनिया ने चेतावनी दी कि विदेश नीति की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
गाजा संघर्ष में नेतन्याहू सरकार के प्रति मोदी का समर्थन नैतिकता से रहित है। कांग्रेस इसे क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा मानती है। ईरान ने 1994 में कश्मीर पर भारत का साथ दिया, जाहेदान में राजनयिक मौजूदगी सुलझाई और वाजपेयी के 2001 तेहरान दौरे की याद दिलाई।
इजरायल से रक्षा, कृषि संबंध मजबूत हैं, लेकिन दोनों के साथ संतुलन सिद्धांतों पर टिका है। खाड़ी में भारतीयों पर हमलों के बीच स्वतंत्र छवि जरूरी है। सोनिया ने सिद्धांतपूर्ण विदेश नीति की मांग की।