
नई दिल्ली। 18वें संविधान संशोधन के बाद प्रांतों को वित्तीय स्वायत्तता मिलने के बावजूद पाकिस्तान का सिंध प्रांत प्रशासनिक लापरवाही और नीतिगत असफलता का प्रतीक बन गया है। ‘हाउसहोल्ड इंटीग्रेटेड इकोनॉमिक सर्वे 2024-25’ नामक रिपोर्ट में यह चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।
सिंध में 14 प्रतिशत घरों में शौचालय की सुविधा नहीं है, जो बलूचिस्तान (12%) से भी बदतर है। पंजाब व खैबर पख्तूनख्वा में यह मात्र 5 प्रतिशत है। ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी के लिए हैंडपंप पर निर्भरता चरम पर है।
शिक्षा क्षेत्र में साक्षरता दर पंजाब से 10 प्रतिशत कम। 40 प्रतिशत स्कूली बच्चे स्कूल से वंचित, टीकाकरण मात्र 67 प्रतिशत, जबकि पंजाब में 79 प्रतिशत। राजनीतिक स्थिरता के बावजूद—चार चुनावों से एक ही पार्टी सत्ता में—विकास ठहरा हुआ है।
रिपोर्ट चेतावनी देती है कि प्रांतों में समान प्रगति के बिना राष्ट्रीय विकास असंभव।
फ्राइडे टाइम्स के लेख में प्रांतों को स्वतंत्र राजस्व जुटाने की वकालत। संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत बलूचिस्तान को गैस रॉयल्टी व केपी को बिजली लाभ मिलना चाहिए, लेकिन क्रियान्वयन शून्य। एनएफसी अवॉर्ड में बिक्री कर हिस्सा—बलूचिस्तान 9%, केपी 15%—संसाधनों के अनुपात में हास्यास्पद।
सिंध भी प्रभावित। संशोधन के बाद संपत्ति कर आदि लगाने का अधिकार है, पर प्रभावशाली वर्ग पर टैक्स लगाने की हिम्मत न केंद्र में, न प्रांत में।