
बर्लिन। जेए सिंध मुत्तहिदा महाज (जेएसएमएम) के अध्यक्ष शाफी बुरफट ने संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने पाकिस्तान की सेना व खुफिया एजेंसियों द्वारा सिंधी राजनीतिक कार्यकर्ताओं की जबरन गुमशुदगी के मामलों में अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की। शाफी बुरफट ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना और खुफिया तंत्र पूर्ण दंडमुक्ति के साथ शांतिपूर्ण संघर्षरत सिंधी कार्यकर्ताओं को मनमाने ढंग से गिरफ्तार कर रहे हैं। इन कार्यकर्ताओं को अमानवीय यातनाएं, लंबी अवैध हिरासत, जबरन गायब करना और न्यायेतर हत्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
बुरफट के मुताबिक, सैकड़ों सिंधी कार्यकर्ता आज भी गुप्त हिरासत और यातना केंद्रों में कैद हैं, बिना किसी न्यायिक वारंट या कानूनी प्रक्रिया के। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “पाकिस्तान अब एक सत्तावादी सैन्य राज्य बन चुका है, जहां ऐतिहासिक राष्ट्रों को दबाया जा रहा है। सिंध में राजनीतिक दमन, आर्थिक शोषण और राष्ट्रीय पहचान का दमन हो रहा है।” सिंधी राष्ट्र इस दमनकारी व्यवस्था को खारिज करता है और ऐसी राज्य व्यवस्था से आजादी चाहता है जो धर्मनिरपेक्ष आंदोलनों को दबाती है लेकिन उग्रवाद को संरक्षण देती है।
उन्होंने विशेष रूप से इजाज गाहो, सरवेच नोहेनी, सोहेल भट्टी, पठान खान जुहरानी और सरवेच सरगानी जैसे कार्यकर्ताओं का जिक्र किया, जो पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों की अवैध हिरासत में हैं। इनके परिवार अनिश्चितता में जी रहे हैं, उन्हें यह तक नहीं पता कि उनके प्रियजन जिंदा हैं या नहीं। बुरफट ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन बताया और वैश्विक समुदाय से इनकी सुरक्षित रिहाई की मांग की। उन्होंने शक्तिशाली देशों की पाकिस्तान को ‘रणनीतिक हितों’ के नाम पर मिलीभगत की भी आलोचना की, जो वैश्विक नैतिकता की विफलता है। #सिंध #जबरनगुमशुदगी #पाकिस्तान



