
अदीस अबाबा। अफ्रीकन यूनियन कमीशन (एयूसी) के चेयरमैन मूसा फकी महमात ने चेतावनी दी है कि अफ्रीकी महाद्वीप पर शांति का खतरा मंडरा रहा है। एयू के राष्ट्राध्यक्षों की 39वीं सभा में उन्होंने कहा कि बंदूकों की गूंज को थामना किसी पर्वतारोहण से कम नहीं।
शनिवार-रविवार को इथियोपिया की राजधानी में आयोजित इस सत्र में महमात ने वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच अफ्रीका की बिगड़ती स्थिति पर रोशनी डाली। राजनीतिक अस्थिरता और संस्थागत कमजोरियां संघर्षों को लंबा खींच रही हैं।
खुले-छिपे विवाद क्रॉनिक हो चुके हैं, जबकि असंवैधानिक सत्ता परिवर्तन आजादी के बाद के काले दौर को याद दिलाते हैं। सूडान, पूर्वी कांगो और सोमालिया जैसे क्षेत्रों में जनता भारी कीमत चुका रही है।
महमात ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था की उथल-पुथल अफ्रीका को बुरी तरह प्रभावित कर रही। एकतरफा नीतियां और संरक्षणवाद बहुपक्षवाद को चुनौती दे रहे। अफ्रीका को बाहरी आघातों से निपटने हेतु अपने संगठन को मजबूत बनाना होगा।
ग्लोबल साउथ का हिस्सा होते हुए भी अफ्रीका की अपनी अलग पहचान है। राजनीतिक-आर्थिक एकीकरण को गति देकर एजेंडा 2063 को साकार करना जरूरी। पैन-अफ्रीकी संस्थाएं दोगुनी मेहनत करें ताकि मजबूत, आत्मनिर्भर अफ्रीका का सपना सच हो।
इथियोपिया के पीएम आबी अहमद ने जनसांख्यिकीय लाभ पर जोर दिया। अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाएं तेजी से बढ़ रही हैं, मगर विकास के लिए युवा शक्ति का सदुपयोग अनिवार्य। 2035 तक अफ्रीका विश्व कार्यबल में सबसे बड़ा योगदान देगा। इसकी सही दिशा से ही सच्ची समृद्धि आएगी।
नेताओं को एकजुट होकर चुनौतियों पर विजय पाने का संकल्प लेना होगा।