
नई दिल्ली, 7 जनवरी। बांग्लादेश में चुनावी माहौल गरमाता जा रहा है, लेकिन इसी बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने खालिदा जिया की मौत पर सियासी बवाल मचाने वालों को करारा जवाब दिया है। उन्होंने इसे एक चिंताजनक प्रवृत्ति करार देते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों में देश को एकजुटता की जरूरत है, न कि विभाजन की।
बीएनपी की पूर्व अध्यक्ष और बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया का 30 दिसंबर 2025 को 80 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ दफनाया गया। लेकिन कुछ नेता उन्हें जेल में सही इलाज न देने का दोष शेख हसीना पर मढ़ रहे हैं।
आईएएनएस को दिए विशेष इंटरव्यू में हसीना ने कहा, ‘बेगम खालिदा जिया की मौत बांग्लादेश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद उनकी सार्वजनिक भूमिका और देशसेवा अतुलनीय रही। उनके परिवार और शोकाकुलों के प्रति मेरी गहरी संवेदना।’ उन्होंने मौत का राजनीतिकरण करने को झूठा आरोप लगाने की बुरी आदत बताया।
बीएनपी की ओर से नजरुल इस्लाम खान ने बयान पढ़ा, जिसमें 2018 से जिया को झूठे मुकदमे में जेल में रखे जाने और इलाज से वंचित रखने का दावा किया गया। लेकिन पूर्व मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी ने खुलासा किया कि हसीना सरकार ने जिया को शीर्ष अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा, विदेशी डॉक्टरों से सर्जरी तक उपलब्ध कराई।
चौधरी ने कहा, ‘हसीना के कार्यकाल के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी। उन्हें घर में रखा गया, जेल की कोठरी में नहीं। यह दुश्मनी से कहीं ऊपर का मानवीय व्यवहार था।’ चुनावी दहलीज पर यह विवाद बांग्लादेश की सियासत की गहरी खाइयों को उजागर करता है। हसीना का संदेश स्पष्ट है- शोक के समय सम्मान पहले।