
12 मार्च 2003 को बेलग्रेड की सड़कों पर एक सनसनीखेज घटना ने यूरोप को हिला दिया। सर्बिया के प्रधानमंत्री जोरान डिंजिच को सरकारी भवन के बाहर स्नाइपर की गोली से मार दिया गया। मौके पर ही उनकी मौत हो गई, जिससे पूरे देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया।
इससे महज कुछ हफ्ते पहले, 21 फरवरी को वे एक ट्रक के काफिले के सामने आने से बाल-बाल बच गए थे। उन्होंने इसे ‘नाकाम कोशिश’ बताते हुए कहा था कि सुधारों को कोई नहीं रोक सकता। पोलिटिका अखबार में उनका बयान सुर्खियां बन गया।
डिंजिच 2000 के बुलडोजर क्रांति के नायक थे, जिन्होंने मिलोसेविच शासन को उखाड़ फेंका। प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने आर्थिक liberalisation, न्यायिक सुधार और मिलोसेविच को हेग ट्रिब्यूनल भेजने जैसे कदम उठाए। इससे राष्ट्रवादियों और माफिया गिरोहों का गुस्सा भड़क उठा।
जांच में जेमुन क्लैन और पूर्व स्पेशल पुलिस के सदस्यों का हाथ सामने आया। सरकार ने ‘ऑपरेशन सेबर’ चलाकर हजारों गिरफ्तारियां कीं, संगठित अपराध को जड़ से उखाड़ा।
दुनिया ने इस हत्या की निंदा की, लेकिन सर्बिया ने सुधार जारी रखे। यूरोपीय संघ के साथ रिश्ते मजबूत हुए, डिंजिच का सपना सच होता चला गया। उनकी शहादत ने लोकतंत्र को और मजबूत किया।