
तपते रेत के टीले और चिलचिलाती धूप के लिए मशहूर सहारा मरुस्थल में 47 साल पहले एक ऐसी घटना घटी, जो आज भी लोगों के होश उड़ा देती है। 18 फरवरी 1979 को अल्जीरिया के ऐन सेफरा शहर में अचानक बर्फबारी शुरू हो गई। सुनहरी रेत पर सफेद चादर बिछ गई, जो दुनिया के सबसे गर्म रेगिस्तान के लिए अभूतपूर्व था।
लगभग 92 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला सहारा उत्तरी अफ्रीका के कई देशों को चीरता हुआ गुजरता है। यहां दिन का पारा 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है। फिर भी उस दिन तापमान शून्य के करीब लुढ़क गया। भूमध्यसागर से आई ठंडी नम हवाओं ने ऊंचे इलाकों से टकराकर बर्फ के फाहे उत्पन्न किए।
वैज्ञानिकों का कहना है कि वायुमंडलीय दबाव में कमी और तापमान गिरने से वर्षा बर्फ में बदल गई। हालांकि बर्फ कुछ घंटों में पिघल गई, लेकिन तस्वीरें और गवाहों के बयान इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गए। ऐन सेफरा, जो एटलस पर्वत के पास स्थित है, अपनी ऊंचाई के कारण ऐसी घटनाओं के लिए संवेदनशील है।
इसके बाद 2016, 2018 और 2021 में भी हल्की बर्फबारी देखी गई। यह घटना जलवायु की जटिलता को दर्शाती है। 1979 की बर्फबारी प्रकृति का संदेश थी कि वह अपने नियमों से हटकर भी आश्चर्यजनक हो सकती है। यह हमें पर्यावरण की अनिश्चितताओं के प्रति सजग रहने की सीख देती है।