
कोलंबो में एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनते हुए भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से पहुंचे। गंगारामया मंदिर में रखे गए इन अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन हो चुका है, जिससे भक्तों में उत्साह की लहर दौड़ गई है।
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में यह प्रतिनिधिमंडल रवाना हुआ था। वरिष्ठ संतों और अधिकारियों के साथ मिलकर उन्होंने पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अवशेषों को श्रीलंका पहुंचाया। यह भारत की सांस्कृतिक विरासत संरक्षण की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
प्रतिनिधिमंडल ने औपचारिक समारोहों, धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया। अप्रैल 2025 में प्रधानमंत्री की श्रीलंका यात्रा के दृष्टिकोण को साकार करते हुए यह आयोजन आध्यात्मिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत कर रहा है।
गुजरात के अरावली जिले के शामलाजी के निकट देवनीमोरी स्थल से प्राप्त ये अवशेष 1957 में प्रोफेसर एसएन चौधरी द्वारा खोजे गए थे। डेसिकेटर में सील कांच के डिब्बे में रखे गए इन्हें सोने की परत वाली चांदी-तांबे की बोतल और रेशमी वस्त्रों से संरक्षित किया गया है।
4 से 11 फरवरी तक प्रदर्शित रहने वाले ये अवशेष 5 फरवरी से सार्वजनिक दर्शन के लिए खुले हैं। 11 को भारत लौटेंगे। यह पहल दोनों देशों के बीच बौद्ध धरोहर के प्रति समर्पण को नई ऊंचाई प्रदान कर रही है।
हजारों भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है, जो न केवल धार्मिक एकता का प्रतीक है बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी महत्वपूर्ण माध्यम साबित हो रहा है।