
नई दिल्ली में रूसी दूतावास ने द्वितीय विश्व युद्ध में नाजीवाद पर ऐतिहासिक जीत की 81वीं वर्षगांठ पर इम्मोर्टल रेजिमेंट रैली का आयोजन किया। यह मार्च उन वीर सैनिकों को समर्पित है जिन्होंने महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध में अपनी जान गंवाई। विक्ट्री डे की पूर्व संध्या पर यह कार्यक्रम भावुक क्षण लेकर आया।
दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन रोमन बाबुश्किन ने कहा, ‘9 मई को विक्ट्री डे है। आज हम इम्मोर्टल रेजिमेंट रैली कर रहे हैं, जो उन हीरोज की याद में है जिन्होंने सोवियत संघ के 27 मिलियन बलिदानों के साथ दुनिया को नाजी खतरे से मुक्त किया। यह पवित्र परंपरा हमारी एकजुट सेना को सलाम करती है।’
रूस द्वारा यूक्रेन में सीजफायर की घोषणा के बावजूद विवादास्पद खबरें आने के बीच यह आयोजन हुआ। सिविल सोसायटी के दलजीत सिंह ने भाग लिया और कहा, ‘यह 1941-45 का युद्ध सोवियत एकता का प्रतीक था। 2.6 करोड़ जानें, 70,000 गांव और 1,700 शहर नष्ट हुए—सब मानवता बचाने को।’
उन्होंने जोड़ा, ‘यह कुर्बानी शांति और स्वतंत्रता के लिए थी, जो इतिहास का टर्निंग पॉइंट बनी। फासिज्म के खिलाफ यह लड़ाई पूरी दुनिया के लिए थी।’ रैली ने खोए वीरों की तस्वीरें थामकर इतिहास को जीवंत किया, भविष्य के लिए सबक देते हुए।
