
बुडापेस्ट में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की यात्रा ने यूएस-हंगरी संबंधों को नई ऊंचाई दी। यहां उन्होंने हंगरी के विदेश मंत्री के साथ नागरिक-परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में रुबियो ने ट्रंप प्रशासन द्वारा दिए गए एक साल के विशेष छूट का जिक्र किया, जो रूसी तेल-गैस पर अमेरिकी प्रतिबंध से संबंधित था।
रुबियो ने स्पष्ट कहा, ‘यह ट्रंप और ऑर्बन के व्यक्तिगत संबंधों का नतीजा था। हम आपकी अर्थव्यवस्था को मजबूत देखना चाहते हैं, आपके देश की प्रगति चाहते हैं। यह हमारे हित में है, खासकर जब तक आप नेतृत्व में हैं।’ 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद हंगरी की रूसी ऊर्जा निर्भरता ने कई यूरोपीय और नाटो देशों को नाराज किया था, लेकिन अमेरिका ने समझदारी दिखाई।
ईरान और चीन पर सवालों के बीच रुबियो ने व्यावहारिक नीति पर जोर दिया। चीन के प्रति उन्होंने कहा, ‘हम किसी देश को अलगाव की सलाह नहीं देते। हर राष्ट्र को अपनी भौगोलिक, आर्थिक और ऐतिहासिक चुनौतियों से जूझना पड़ता है।’ राष्ट्रपति ट्रंप के अप्रैल में चीन दौरे का ऐलान करते हुए बोले, ‘वहां अरबों लोग, दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और परमाणु शक्ति—बातचीत न करना पागलपन होगा। मतभेद हैं, लेकिन उन्हें संभाला जा सकता है।’
ऑर्बन ने ट्रंप काल के 17 अमेरिकी निवेशों की सराहना की और इसे दोनों देशों के ‘स्वर्णिम युग’ की शुरुआत बताया। रुबियो ने रूस-यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की मध्यस्थता क्षमता और ईरान से सौदे की कोशिशों का उल्लेख किया। ईरान को ‘कट्टरपंथी धार्मिक राष्ट्र’ कहते हुए भी उन्होंने प्रयास जारी रखने की बात कही। यह यात्रा ऊर्जा, परमाणु और कूटनीति में नए अध्याय की शुरुआत है।