
मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव छठे दिन भी चरम पर है। इस संकट के बीच वॉशिंगटन ने कूटनीतिक मोर्चा मजबूत करने की मुहिम तेज कर दी है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इटली, साइप्रस, तुर्की और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों से महत्वपूर्ण बातचीत की।
रुबियो ने सबसे पहले इटली के एंटोनियो तजानी से चर्चा की। दोनों ने ईरान की हरकतों और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर विचार-विमर्श किया। अमेरिका-इटली की मजबूत साझेदारी को दोहराया गया, जो भूमध्यसागरीय कूटनीति में अहम है।
साइप्रस के कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस के साथ बातचीत में ईरान संकट के व्यापक प्रभाव पर जोर रहा। वॉशिंगटन और निकोसिया के बीच संबंधों को और सशक्त बनाने का वादा हुआ।
तुर्की के हकन फिदान को रुबियो ने स्पष्ट संदेश दिया कि तुर्की की संप्रभुता पर कोई हमला बर्दाश्त नहीं। पूर्ण अमेरिकी समर्थन का भरोसा दिलाया गया, नाटो सदस्य तुर्की की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए।
सऊदी के प्रिंस फैसल बिन फरहान को रियाद में अमेरिकी दूतावास हमले के जवाब के लिए धन्यवाद दिया। ईरानी खतरे और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन बात हुई, सऊदी की ऊर्जा-कूटनीति भूमिका को रेखांकित करते हुए।
ये बातें अमेरिका की एकजुट रणनीति को दर्शाती हैं। यूरोपीय और खाड़ी साझेदारों के साथ तालमेल से ईरान को कूटनीतिक रूप से घेरने की कोशिश हो रही है, ताकि मध्य पूर्व में शांति बहाल हो सके।