
ईरान की राजधानी तेहरान समेत पूरे देश में हालात चरम पर पहुंच गए हैं। महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग दो सप्ताह से अधिक समय से आंदोलनरत हैं। हिंसक झड़पों में कई जानें जा चुकी हैं, जबकि इंटरनेट सेवाएं 36 घंटों से ठप हैं। ईरानी सरकार ने अमेरिका और इजरायल पर साजिश रचने का आरोप लगाया है, लेकिन वॉशिंगटन ने प्रदर्शनकारियों को खुला समर्थन दे दिया है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट संदेश जारी किया, ‘यूनाइटेड स्टेट्स ईरान के साहसी लोगों के साथ खड़ा है।’ राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनियों के बाद यह बयान महत्वपूर्ण है। इससे ठीक पहले लेबनान में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने प्रदर्शनों को विदेशी साजिश बताया था, जिसे अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भ्रमपूर्ण करार दिया।
निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी आंदोलन के प्रमुख चेहरे बन चुके हैं। उन्होंने फारसी में वीडियो संदेश जारी कर सरकारी कर्मचारियों से राष्ट्रव्यापी हड़ताल की अपील की। गुरुवार-शुक्रवार की रात सड़कों पर उतरने वाले प्रदर्शनकारियों की हिम्मत की सराहना करते हुए उन्होंने सरकार की पकड़ कमजोर करने का आह्वान किया।
यातायात और ऊर्जा क्षेत्र के कर्मचारियों को संबोधित करते हुए पहलवी ने शनिवार रात और रविवार शाम 6 बजे फिर सड़कों पर उतरने को कहा। उन्होंने तख्तापलट का जिक्र किया, ‘अब सिर्फ सड़कें नहीं, शहरों के केंद्रों पर कब्जा करने की तैयारी है।’ उन्होंने वतन वापसी की भी घोषणा की, जो उनके अनुसार ‘बहुत करीब’ है।
ये घटनाक्रम ईरानी शासन के लिए खतरे की घंटी हैं। वैश्विक निगाहें टिकी हैं कि क्या ये विरोध पूरे तंत्र को हिला देंगे।