
शेख हसीना की सत्ता खत्म होने और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के सत्ता संभालने के बाद बांग्लादेश का प्रशासनिक ढांचा कमजोर हो गया है। इस कमजोरी का फायदा उठाते हुए इस्लामिक कट्टरपंथी तत्व अल्पसंख्यक हिंदू और ईसाई समुदायों पर हमले तेज कर रहे हैं। एक नई रिपोर्ट में इस खतरे को रेखांकित किया गया है, जिसमें ईसाई परिवारों की सुरक्षा की मांग प्रमुख है।
दक्षिणी सतखीरा जिले के टेटुलिया गांव में सेंट फ्रांसिस जेवियर चर्च से जुड़े पांच कैथोलिक परिवारों ने 1 जनवरी को मानव श्रृंखला बनाकर विरोध जताया। कैथोलिक न्यूज साइट क्रक्स के अनुसार, पिछले एक साल में स्थानीय मुस्लिमों ने इन पर कम से कम चार हमले किए। क्रिसमस के ठीक बाद का ताजा हादसा सबसे बर्बर था।
पीड़ित सबुज गोल्डर ने कहा, ‘क्रिसमस के बाद 50 लोगों ने हथियारों से हमला किया। हम यहां महज पांच ईसाई परिवार हैं।’ उन्होंने अपील की, ‘हम अल्पसंख्यक हैं, लेकिन देश के नागरिक। न्याय और सुरक्षा हमें क्यों न मिले?’
यह झगड़ा जमीन विवाद से उपजा है। पड़ोस के गांव के एक ईसाई शिक्षक ने बताया कि क्रिसमस पर हमले बढ़े, लेकिन स्थानीय नेताओं से बातचीत जारी है। नए साल पर स्कूलों में किताबें बांटी गईं, फिर भी बच्चों को कक्षा में रोका गया।
पुलिस अधिकारी जाहांगीर हुसैन ने घटनाओं की पुष्टि की और कहा कि स्थानीय स्तर पर समाधान के प्रयास चल रहे हैं। दिसंबर में यूनियन ऑफ कैथोलिक एशियन न्यूज की रिपोर्ट ने ढाका में चर्चों पर हमलों का जिक्र कर ईसाई समुदाय के डर को उजागर किया था।
मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की चिंता बढ़ रही है। अंतरिम सरकार को सख्त कदम उठाने होंगे, वरना सामाजिक सौहार्द खतरे में पड़ सकता है। पीड़ितों की यह एकजुट अपील सरकार के लिए परीक्षा है।