
वॉशिंगटन। भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण क्वाड तथा 2+2 संवाद जैसे महत्वपूर्ण सुरक्षा ढांचों में गति धीमी पड़ रही है। सीनेट खुफिया समिति के अध्यक्ष मार्क वार्नर ने आइएएनएस को दिए विशेष साक्षात्कार में कहा कि इंडो-प्रशांत क्षेत्र में विश्वास निर्माण की कोशिशें इन तनावों से प्रभावित हो रही हैं।
डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में लौटने के बाद संबंधों में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। वार्नर ने जोर देकर कहा कि पारंपरिक कूटनीति और सुरक्षा तंत्रों को निरंतर राजनीतिक ध्यान की आवश्यकता होती है, जबकि वर्तमान प्रशासन ने इस पर कम जोर दिया है।
उन्होंने कहा, “2+2 और क्वाड जैसी पहलें विश्वास बढ़ाने वाले उपकरण हैं। इनमें काफी समय और ऊर्जा लगती है। छोटे-मोटे समझौते भी महत्वपूर्ण होते हैं।” वार्नर ने भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया वाले क्वाड समूह की मंत्रीस्तरीय बैठकों का उल्लेख किया।
वार्नर ने इस मंदी को द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक दबाव से जोड़ा। उन्होंने चेताया कि अमेरिका की असंगत भागीदारी से सहयोगी देश उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठा सकते हैं। “जब साझेदार चीन को अमेरिका से अधिक भरोसेमंद मानने लगें, यह चिंताजनक है। यह भारत पर भी लागू होता है।”
“अगर भारतीय अधिकारी अमेरिका पर निर्भर न रहने की बात करें, तो यह बड़ी समस्या है,” उन्होंने कहा। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद स्थापित मंचों से निरंतर संवाद क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अनिवार्य है। चीन के विस्तारवादी प्रभाव के बीच क्वाड सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और स्थिरता के लिए केंद्रीय मंच है।
भारत के लिए इन संवादों को तेज करना क्षेत्रीय शक्ति संतुलन, रणनीतिक स्वायत्तता और रक्षा सहयोग गहराने के लिए जरूरी है। वार्नर की टिप्पणियां इन संबंधों को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर देती हैं।