
वाशिंगटन। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने अमेरिका में तेज होती महंगाई की असली वजह आयातित वस्तुओं पर लगे टैरिफ बताई है। लोगों की बढ़ी मांग को इसके लिए जिम्मेदार ठहराने के बजाय उन्होंने व्यापार शुल्कों पर जोर दिया। यह बयान ऐसे समय में आया जब पूरी दुनिया अमेरिकी व्यापार नीतियों के प्रभाव को परख रही है।
बुधवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पॉवेल ने स्पष्ट किया कि महंगाई के आंकड़े मुख्य रूप से वस्तुओं की कीमतों में उछाल दिखाते हैं, जो टैरिफ से उपजा है। सेवाओं की कीमतों पर दबाव कम हो रहा है। एफओएमसी ने ब्याज दरें 3.5-3.75 प्रतिशत पर स्थिर रखीं, क्योंकि महंगाई अभी भी 2 प्रतिशत लक्ष्य से ऊपर है।
टैरिफ का अधिकांश असर अब समाप्त हो चुका है। पॉवेल ने कहा कि ये एकमुश्त मूल्यवृद्धि पैदा करते हैं, जो चरम पर पहुंचकर घटने लगती है। दिसंबर तक कोर पीसीई 3.0 प्रतिशत और कुल पीसीई 2.9 प्रतिशत रही। उम्मीदें स्थिर हैं।
फेड नई टैरिफ नीतियों पर नजर रखेगा। अर्थव्यवस्था मजबूत वृद्धि पर है, उपभोक्ता खर्च और निवेश बढ़ रहे हैं, हाउसिंग कमजोर। टैरिफ वाली महंगाई मांगजनित से आसान है। भारत जैसे साझेदारों पर वैश्विक असर पड़ेगा।