
प्राकृतिक आपदाओं से जूझते पुर्तगाल में रविवार को राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग होगी। इस संकटपूर्ण माहौल में देश की मुख्यधारा की पार्टियां वैचारिक मतभेद भुलाकर असामान्य रणनीति अपना रही हैं। प्रतिद्वंद्वी दल चEGA जैसे दक्षिणपंथी चरमपंथी समूह को सत्ता से दूर रखने के लिए एकजुट हो गए हैं।
हाल के तूफानों ने बुनियादी सुविधाओं को ध्वस्त कर दिया। जनजीवन ठप हो गया और आपदा प्रबंधन पर सवाल उठे। आर्थिक अनिश्चय और अस्थिरता के बीच जनता का गुस्सा चरम पर है, जिसका फायदा चरमपंथी उठा सकते हैं।
पहले चरण में समाजवादी उम्मीदवार एंटोनियो जोस सेघुरो को 31.1 प्रतिशत वोट मिले। चEGA के आंद्रे वेंचुरा को 23.5 प्रतिशत, जबकि लिबरल इनिशिएटिव के जोआओ कोट्रिम को 16 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए। सत्ताधारी पीएसडी के लुई मार्केस मेंडेस पांचवें स्थान पर रहे।
कैटोलिका यूनिवर्सिटी के पोल में सेघुरो को 67 प्रतिशत समर्थन दिखा, वेंचुरा को 33 प्रतिशत। पूर्व राष्ट्रपति एनीबल कैवाको सिल्वा, उपप्रधानमंत्री पाउलो पोर्टास समेत सेंटर-राइट नेताओं ने समर्थन दिया। 6600 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर अभियान चलाया।
लिस्बन के मेयर कार्लोस मोएडास ने भी समर्थन जताया, समाज को बांटने से इंकार करने पर। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह समर्थन सीमित असर डालेगा।
दो बड़े तूफानों से कैंपेन छोटा पड़ा, 15 फरवरी तक इमरजेंसी लगी। वेंचुरा की वोटिंग टालने की मांग खारिज।
यह चुनाव पुर्तगाल के लोकतंत्र की परीक्षा है। मतदाता तय करेंगे—टकराव या सहयोग?