
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित पांच दिवसीय इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग जनकल्याण और सभी वर्गों के लाभ के लिए होना चाहिए। सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट में उन्होंने कहा कि बुद्धि, तर्क और निर्णय क्षमता विज्ञान को आमजन के लिए सुलभ बनाती है।
सोमवार से शुरू यह ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन ग्लोबल साउथ में पहली बार इतने बड़े स्तर पर हो रहा है। राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री, तकनीकी दिग्गज, शोधकर्ता और उद्योग प्रतिनिधि एक मंच पर हैं, जो एआई के माध्यम से समावेशी विकास, सार्वजनिक व्यवस्था मजबूती और सतत प्रगति पर चर्चा कर रहे हैं।
20 फरवरी तक चलने वाले इस आयोजन में 100 से अधिक सरकारी प्रतिनिधि, 20 राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री और 500 वैश्विक एआई नेता शामिल हैं। 19 फरवरी को पीएम मोदी का उद्घाटन भाषण वैश्विक सहयोग की रूपरेखा बनेगा।
तीन प्रमुख चुनौतियां- एआई फॉर ऑल, एआई बाय हर और युवआई- समावेशी एआई को बढ़ावा देंगी। 60 देशों से 4650 आवेदन मिले, 70 फाइनलिस्ट चयनित। ये नवाचार नीति निर्माताओं और निवेशकों से जुड़ेंगे।
18 फरवरी को आईआईटी हैदराबाद के सहयोग से अनुसंधान संगोष्ठी होगी, जिसमें 250 प्रस्तुतियां होंगी। एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव भाग लेंगे। एआई शासन, सुरक्षा और समान पहुंच पर विमर्श होगा।
भारत जिम्मेदार एआई का वैश्विक केंद्र बन रहा है।