
अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से मुलाकात के दौरान बेबी अरिहा शाह का मामला प्रमुखता से चर्चा में रहा। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि पीएम ने खुद इस संवेदनशील मुद्दे को उठाया, जो भारतीय बच्ची की जर्मनी में फॉस्टर केयर की कैद को उजागर करता है।
गुजरात के धरा और भावेश शाह ने 2018 में बेहतर नौकरी के लिए जर्मनी का रुख किया। 2021 में जन्मी उनकी बेटी अरिहा को सात माह की उम्र में नानी के गोद में दूध पिलाते हुए चोट लगी। अस्पताल ने शक के आधार पर यूगेंडएम्ट को सूचना दी, जिसने बच्ची को माता-पिता से अलग कर लिया।
डीएनए और मेडिकल जांचों से यौन शोषण या अपराध साबित नहीं हुआ। 2022 में पुलिस ने केस बंद कर दिया, लेकिन एजेंसी ने ‘हिंसक व्यवहार’ का आरोप लगाकर कोर्ट से पैरेंटिंग राइट्स छीनवा लिए। तब से अरिहा फॉस्टर केयर में है।
भारत सरकार लगातार प्रयासरत है। मिस्री ने कहा कि जर्मन अधिकारियों से हर स्तर पर बात चल रही है। पीएम मोदी ने चांसलर से मानवीय पहलुओं पर जोर दिया। परिवार से निरंतर संपर्क में रहते हुए भारतीय संस्कृति का पालन सुनिश्चित करने की कोशिश हो रही है—जैसे भारतीय समुदाय से जुड़ाव, त्योहार मनाना, हिंदी सिखाना।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी पिछले साल इसकी पैरवी की। मिस्री ने परिवार की पीड़ा को स्वीकार करते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। यह मामला भारत-जर्मनी संबंधों में प्राथमिकता वाला है।
अरिहा का सांस्कृतिक, धार्मिक माहौल जरूरी मानकर भारत लड़ रहा है। आने वाले अपडेट्स से उम्मीद बंधी है कि न्याय होगा।
