
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र की शुरुआत बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संयुक्त बैठक को संबोधन से हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस भाषण को देश की विकास गाथा का मार्गदर्शक बताया।
एक्स पर पोस्ट में पीएम ने कहा कि यह प्रेरक संबोधन संसदीय परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह नीतिगत दृष्टिकोण और सामूहिक इरादे को रेखांकित करता है जो आने वाले समय में भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
भाषण व्यापक था जिसमें भारत की हालिया उपलब्धियों का जिक्र था और भविष्य की स्पष्ट रूपरेखा भी। विकसित भारत पर बल देते हुए आत्मनिर्भर राष्ट्र की साझा महत्वाकांक्षा को मजबूती मिली।
किसानों, युवाओं, गरीबों व पिछड़ों के लिए प्रयासों, सुधारों में गति, नवाचार व सुशासन पर प्रतिबद्धता को दोहराया गया।
राष्ट्रपति ने सरकारी कामकाज की सराहना की। दलितों, पिछड़ों, वंचितों व आदिवासियों के प्रति संवेदनशीलता का उल्लेख किया। सबका साथ-सबका विकास से हर जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।
2014 में 25 करोड़ तक सीमित सोशल सिक्योरिटी अब 95 करोड़ लोगों को कवर करती है।
युवा, किसान, मजदूर व उद्यमी विकसित भारत में योगदान बढ़ा रहे हैं, पिछले साल के आंकड़े इसका प्रमाण।
यह संबोधन बजट सत्र को नई ऊर्जा देगा।