
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ मिलकर भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की वार्ता समाप्ति का स्वागत किया। 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान में इसे रणनीतिक साझेदारी की ऐतिहासिक कड़ी करार दिया गया।
यह समझौता दोनों के बीच व्यापार और निवेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। साझा समृद्धि, मजबूत सप्लाई चेन और सतत विकास को बल मिलेगा। वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में यह साझेदारी विकास, रोजगार और हरित परिवर्तन के लिए अनिवार्य है।
नेताओं ने डब्ल्यूटीओ सुधारों पर बल दिया, ताकि सभी देशों के हित सुरक्षित रहें। एफटीए को शीघ्र लागू करने के साथ निवेश संरक्षण और भौगोलिक संकेत समझौतों पर तेजी से काम होगा।
निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाने और द्विपक्षीय निवेश को प्रोत्साहन देने पर सहमति बनी। तकनीक क्षेत्र में दोनों की ताकतें पूरक हैं, इसलिए ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (टीटीसी) के जरिए रिसर्च, इनोवेशन और वैल्यू चेन में सहयोग गहराया जाएगा।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, नई तकनीकों और स्टार्टअप्स पर जोर। भारत-ईयू इनोवेशन हब और स्टार्टअप पार्टनरशिप शुरू होगी। विज्ञान-तकनीक समझौते को 2030 तक विस्तार और होराइजन यूरोप से जुड़ाव पर सहमति।
स्वच्छ ऊर्जा में ग्रीन हाइड्रोजन टास्क फोर्स और 2026 विंड समिट का स्वागत। कनेक्टिविटी पार्टनरशिप, एविएशन, समुद्री सहयोग और आईएमईसी से नए अवसर खुलेंगे।
फरवरी में एआई इम्पैक्ट समिट को समर्थन। बिजनेस फोरम में उद्योगपतियों से निवेश और व्यापार वृद्धि का आह्वान किया गया, जो साझेदारी को मजबूत बनाएगा।