
वाशिंगटन। पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारी एल्ब्रिज कोल्बी ने सीनेट सशस्त्र सेवा समिति को बताया कि ट्रंप प्रशासन की 2026 नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी का मुख्य फोकस इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के वर्चस्व को रोकना है। इस रणनीति में सहयोगी देशों से अपनी सुरक्षा के लिए अधिक जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा की गई है।
कोल्बी ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सैन्य योजना एशिया में शक्ति संतुलन बनाए रखने पर केंद्रित है। दुनिया के सबसे बड़े बाजार वाले इस क्षेत्र में चीन को हावी होने से रोकना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका चीन से टकराव नहीं चाहता, बल्कि बीजिंग को क्षेत्रीय प्रभुत्व स्थापित करने से रोकेगा।
फर्स्ट आइलैंड चेन, जो जापान से ताइवान और फिलीपींस तक फैला है, पेंटागन का प्रमुख ऑपरेशनल क्षेत्र बनेगा। यहां चीनी सैन्य विस्तार को रोकने के लिए मजबूत बचाव क्षमता विकसित की जाएगी। इससे एशिया में स्थिरता सुनिश्चित होगी और वैश्विक संकटों से निपटने की लचीलापन मिलेगा।
इंडो-पैसिफिक की विशाल अर्थव्यवस्था अमेरिकी हितों के लिए महत्वपूर्ण है। कोल्बी ने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया, जो चीन की सैन्य शक्ति से चिंतित हैं। कई देश अपनी स्वायत्तता बचाना चाहते हैं और किसी एक शक्ति के अधिपत्य का विरोध कर रहे हैं।
रणनीति जिम्मेदारी बंटवारे पर आधारित है। कोल्बी ने कहा कि अमेरिकी सेना असीमित संसाधनों वाली नहीं है। यूरोप और एशिया के समृद्ध सहयोगियों को रक्षा व्यय बढ़ाना चाहिए। नाटो को रूस के खिलाफ पारंपरिक रक्षा का नेतृत्व करना होगा, जबकि दक्षिण कोरिया को उत्तर कोरिया रोकने की मुख्य जिम्मेदारी लेनी होगी।
लंबे संघर्ष के लिए रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ानी होगी। कोल्बी ने राष्ट्रीय गतिशीलता की वकालत की, ताकि उन्नत हथियार जल्दी उपलब्ध हों। चीन मुख्य चुनौती है, लेकिन रूस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे खतरे भी नजरअंदाज नहीं किए जाएंगे। हालांकि, अति-प्रतिबद्धता से बचना जरूरी है।
भारत सहित इंडो-पैसिफिक देशों के लिए यह रणनीति शक्ति संतुलन पर जोर देकर महत्वपूर्ण है, जो क्षेत्रीय साझेदारी को मजबूत करेगी।