
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली में सनसनीखेज खुलासा किया। उन्होंने अफगानिस्तान के लंबे संघर्षों में पाकिस्तान की भूमिका को धार्मिक उत्साह से जोड़ने से साफ इनकार कर दिया। आसिफ के अनुसार, यह सब राजनीतिक वैधता और खासकर अमेरिका जैसे वैश्विक महाशक्तियों का समर्थन हासिल करने की रणनीति थी।
आसिफ ने शीत युद्ध से लेकर 9/11 के बाद के दौर तक की घटनाओं का जिक्र किया। अफगान मीडिया आमू टीवी के हवाले से उन्होंने कहा, ‘हम जिहाद या इस्लाम की रक्षा के लिए नहीं लड़े। हमारा मकसद महाशक्ति का साथ और वैश्विक मान्यता पाना था।’
सोवियत-अफगान युद्ध को उन्होंने प्रॉक्सी वॉर करार दिया, जिसे पाकिस्तान ने जिहाद के रूप में प्रचारित किया। इसके लिए शिक्षा व्यवस्था तक बदल दी गई, जिसका असर आज भी पाठ्यक्रम में दिखता है। आसिफ ने स्वीकार किया कि समाज, राजनीति और धर्म को इस कथा के अनुरूप ढाला गया।
सोवियत सेना की वापसी के बाद भी पाकिस्तान ने सबक नहीं लिया। 9/11 के बाद अमेरिका के अफगान अभियान में दो दशकों तक साथ दिया। ‘हमने खुद को किराए पर दे दिया, सिर्फ समर्थन के लिए,’ उन्होंने कहा। आसिफ ने यह भी बताया कि 9/11 में कोई अफगान शामिल नहीं था, फिर भी पाकिस्तान युद्ध में कूद पड़ा।
यह बयान पाकिस्तानी नेतृत्व की ऐतिहासिक गलतियों को मानने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। तालिबान शासित अफगानिस्तान के दौर में पाक की नीति पर नए सिरे से विचार की जरूरत है।