
पाकिस्तान में शिक्षा का भयावह संकट उजागर हुआ है। 2023 जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि देश के 63 प्रतिशत युवाओं और 23 प्रतिशत किशोरों ने कभी औपचारिक शिक्षा का मुंह नहीं देखा। यह स्थिति लाखों युवाओं को सामाजिक हाशिए पर ठेल रही है, जहां नीति निर्माण में ये सबसे उपेक्षित वर्ग हैं।
महिलाओं की स्थिति और भी दयनीय है। 15 से 29 वर्ष की 75 प्रतिशत महिलाएं अनपढ़ हैं, जबकि पुरुषों में यह 50 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह शिक्षा की कमी से कहीं अधिक है—यह बेहतर नौकरियों, स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन से स्थायी वंचन का प्रतीक है।
खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब में सस्टेनेबल डेवलपमेंट पॉलिसी इंस्टीट्यूट व यूएनएफपीए के संयुक्त अध्ययन ने आउट ऑफ स्कूल युवाओं की चुनौतियों का जायजा लिया। इसका लक्ष्य इन युवाओं को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और नागरिकता में पुनर्स्थापित करने के रास्ते खोजना था।
75 प्रतिशत युवाओं ने आर्थिक किल्लत को स्कूल छोड़ने का मुख्य कारण बताया। घरेलू बोझ, काम का दबाव, स्कूलों की कमी, दूरियां, असुरक्षित यात्रा और सामाजिक रूढ़ियां—लड़कियों के लिए विशेष रूप से—समस्याओं को बढ़ाती हैं। कम उम्र शादियां और उत्पीड़न का भय लड़कियों की राह में सबसे बड़ी रुकावट।
लड़के कम उम्र में कठिन कम मजूरी करते हैं, दो-तिहाई ने कमाई का दबाव स्वीकारा। लड़कियां 85 प्रतिशत समय बिना मजदूरी के घरेलू कामों में बिताती हैं। उनकी औसत शादी 18 वर्ष की उम्र में होती है।
रोजगार पर असर गहरा: 75 प्रतिशत के पास कोई पगार वाला काम नहीं, महिलाएं सबसे प्रभावित। काम करने वाले असंगठित क्षेत्र में 25,000 रुपये से कम कमाते हैं। 90 प्रतिशत से ज्यादा को कौशल प्रशिक्षण नहीं मिला।
स्वास्थ्य संकट भी गंभीर—कुपोषण, दर्द, मानसिक परेशानियां आम, लेकिन खर्च, यात्रा और जागरूकता की कमी से इलाज दूर। पाकिस्तान को तत्काल कदम उठाने होंगे।