
एथेंस से आई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान में सक्रिय जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन गाजा के संकट का लाभ उठाकर अपने नेटवर्क को फिर से खड़ा करने और भारत विरोधी हमलों के लिए नई भर्ती में लगे हैं। ये समूह मानवीय सहायता के नाम पर धन जुटा रहे हैं जो आंतक के लिए इस्तेमाल हो रहा है।
एफएटीएफ की निगरानी में कमजोरियों का फायदा उठाते हुए पाकिस्तान की एजेंसियों ने इन्हें मौका दिया। ग्रे लिस्टिंग के सबक से सीखते हुए आतंकियों ने फंडिंग के तरीके बदल लिए—अब बैंक के बजाय डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टोकरेंसी का सहारा।
थिंक टैंक जियोपॉलिटिको के अनुसार, मसूद अजहर का बेटा हम्माद और भाई तल्हा गाजा राहत के बहाने पैसे इकट्ठा कर रहे। ईजीपैसा जैसे प्लेटफॉर्म पर 300 से ज्यादा मस्जिदों के नाम पर चंदा, लेकिन मकसद भारत के खिलाफ जिहाद।
7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले से भड़के युद्ध ने इन्हें परफेक्ट कवर दिया। खाड़ी और पश्चिमी देशों के पाकिस्तानी प्रवासियों के नेटवर्क पुराने चैरिटी ढांचों से धन भेजते रहे, जो कश्मीर अशांति और मुंबई हमलों में खर्च हुआ।
यह प्रवृत्ति क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है। अंतरराष्ट्रीय दबाव और सख्त निगरानी जरूरी है ताकि ये संगठन दोबारा ताकतवर न बनें।