
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे ने दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई दी है। उन्हें इजरायल का सर्वोच्च सम्मान मिला और रक्षा, व्यापार व सुरक्षा क्षेत्रों में कई अहम समझौते हुए। खासतौर पर आयरन डोम सिस्टम को भारत में विकसित करने का एमओयू पाकिस्तान को चुभ गया है।
इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के हेक्सागन गठबंधन प्रस्ताव ने पाकिस्तान को बैकफुट पर ला दिया। सीनेट ने जल्दबाजी में प्रस्ताव पारित कर इसे क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा ठहराया। पाकिस्तानी मीडिया में प्राइम टाइम डिबेट्स में मुशाहिद हुसैन और मलीहा लोधी जैसे विशेषज्ञों ने इसे मुस्लिम-विरोधी साजिश करार दिया।
कारगिल युद्ध से लेकर बालाकोट स्ट्राइक तक इजरायली हथियारों ने भारत की ताकत दिखाई। मिराज जेट्स पर लाइटनिंग पॉड्स, हेरॉन ड्रोन और लेजर बमों ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को करारा जवाब दिया। नए एमओयू से सह-विकास का रास्ता खुला तो पाकिस्तान की घबराहट साफ झलकने लगी।
भारतीय अधिकारी पाकिस्तान के दोहरे चरित्र पर चुटकी लेते हैं। एक तरफ रक्षा साझेदारी की निंदा, दूसरी तरफ हमास जैसे संगठनों का समर्थन। भारत के बंधन रक्षात्मक हैं, पाकिस्तान के आक्रामक।
मोदी-नेतन्याहू की केमिस्ट्री ने रणनीतिक साझेदारी को अटल बना दिया। पश्चिम एशिया के बदलते समीकरणों में पाकिस्तान की चिंता जायज लगती है, लेकिन भारत स्पष्ट है- ये रिश्ते सुरक्षा और पारस्परिक लाभ के लिए हैं, किसी दुश्मनी के लिए नहीं।