
लाहौर। पाकिस्तान के पंजाब में वन्यजीव अधिकारियों ने निजी फार्महाउसों से 59 बड़े शिकारी जानवरों को जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई देश में तेजी से पनप रही विदेशी पालतू जानवरों की खतरनाक संस्कृति को एक बार फिर सामने लाई है।
नए नियमों के तहत की गई इस सख्ती ने सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण को प्राथमिकता दी। स्थानीय मीडिया ने इसे गंभीर खतरे के रूप में चिह्नित किया है। द नेशन अखबार के संपादकीय ने इसे वन्यजीव संरक्षण में व्यापक सुधार की दिशा बताया।
पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय संधियों का पक्षधर है, लेकिन घरेलू स्तर पर लापरवाही ने एक छिपी अर्थव्यवस्था को जन्म दिया। शेर-बाघ जैसे जानवरों का निजी स्वामित्व सामाजिक दिखावे का हिस्सा बन गया है।
ये फार्म अक्सर खराब बाड़ों, अपर्याप्त चिकित्सा और उत्तेजना के अभाव से ग्रस्त होते हैं। जानवर प्राकृतिक जीवन से कट जाते हैं, तनावग्रस्त होकर असमय मरते हैं।
यह प्रवृत्ति जैव विविधता के लिए नैतिक अपराध है। समाधान में एक्ज़ॉटिक पेट्स पर पूर्ण प्रतिबंध, सख्त लाइसेंसिंग और पुनर्वास केंद्रों पर निवेश जरूरी। वन्यजीव साझा धरोहर हैं, इन्हें दिखावे की वस्तु न बनाएं। यह जब्ती बदलाव की पहली कड़ी हो सकती है।