
पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर करीब 55 रुपये की अचानक बढ़ोतरी से पूरे देश में हाहाकार मच गया है। पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं और लोग गुस्से से लाल हैं। सरकार मध्य पूर्व के तनाव को दोष दे रही है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह संकट देश की ऊर्जा व्यवस्था की गहरी कमियों को उजागर करता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव से होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता का खतरा मंडरा रहा है, जहां से दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है। पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह वैश्विक उथल-पुथल घरेलू कीमतों को आसमान छूने पर मजबूर कर देती है।
वित्त मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि पेट्रोलियम आयात बिल का बड़ा हिस्सा है, फिर भी देश नवीकरणीय ऊर्जा के अपार अवसरों का फायदा नहीं उठा पा रहा। अध्ययनों से साफ है कि पुरानी रिफाइनरियां और विदेशी तेल पर अति-निर्भरता ही बार-बार संकट पैदा कर रही है।
इस बढ़ोतरी से महंगाई को बल मिलेगा, क्योंकि परिवहन खर्च बढ़ने से राशन और जरूरी सामान महंगे हो जाएंगे, खासकर गरीब परिवारों पर असर पड़ेगा। अतीत में सब्सिडी जैसे अस्थायी कदम उठाए गए, लेकिन संरचनात्मक सुधारों की कमी बनी रही।
ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन जैसी परियोजनाएं राजनीतिक बाधाओं में अटकी हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रणनीतिक भंडार बढ़ाएं, रिफाइनरियों को अपग्रेड करें और सौर-पवन ऊर्जा में निवेश करें ताकि आयात पर निर्भरता घटे और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो।