
लाहौर, 7 फरवरी। पाकिस्तान में आतंकी हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। बम धमाके और फायरिंग की घटनाएं रोजाना सुर्खियां बटोर रही हैं। आम नागरिकों की जानें जा रही हैं, लेकिन सत्ताधारी नेता एक-दूसरे पर दोषारोपण करने में जुटे हैं। सूचना मंत्री अताउल्लाह तारार ने बढ़ते आतंकवाद का सारा ठीकरा पीटीआई के सिर फोड़ा, तो पार्टी ने उनके बयान को नफरत भरा करार दिया।
शुक्रवार को इस्लामाबाद के एक इमामबाड़े में हुए सुसाइड ब्लास्ट के बाद शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में तारार ने पूर्व पीएम इमरान खान को ‘तालिबान खान’ कहकर चिढ़ाया। उन्होंने सेफ सिटी कैमरों और सुरक्षा बलों की मौजूदगी में हुए हमले को दुखद तो बताया, लेकिन नाकामी नहीं।
रिपोर्टर के सवाल पर तारार ने कहा कि रद्दुल फसाद और जरब-ए-अजब जैसे ऑपरेशनों ने आत्मघाती हमलों को खत्म कर दिया था और कराची में शांति लाई थी। फिर एक सरकार आई जिसने आतंकियों को ‘शांतिप्रिय भाई’ कहकर बस्तियों में बसाया। यह इशारा इमरान की टीटीपी नीति की ओर था। ‘तालिबान खान की सोच का खामियाजा भुगत रहे हैं,’ उन्होंने कहा।
तारार ने व्यंग्य किया कि दहशतगर्दी की वापसी के पीछे पीटीआई है। जवाब में पीटीआई ने ट्वीट किया कि भयानक हमले के अगले दिन मंत्री का हंसना-मजाक करना और नफरत फैलाना साबित करता है कि उन्हें जनता की परवाह नहीं। दूसरे पोस्ट में उन्हें ‘जोकर’ कहा, जो चार साल की सरकार में भी पीटीआई पर इल्जाम लगाते हुए मुस्कुराते हैं।
यह विवाद पाकिस्तान की सियासी जंग को उजागर करता है, जहां आतंकवाद के साये में नेता बयानबाजी कर रहे हैं। जनता को अब एकजुट प्रयासों की जरूरत है, न कि आपसी आरोपों की।