
नई दिल्ली। एक नई रिपोर्ट में पाकिस्तान अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी जारी की गई है। यदि तत्काल व्यापक सुधार नहीं किए गए तो 2031 तक देश ‘प्रबंधित गिरावट’ की स्थिति में पहुंच सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स आधार बढ़ाना, ऊर्जा क्षेत्र की कमियों को दूर करना और शासन में एलीट कैप्चर जैसी संरचनात्मक समस्याओं का समाधान अनिवार्य है।
अगले पांच वर्षों में आधे-अधूरे सुधारों से जीडीपी वृद्धि दर मात्र 2-3 प्रतिशत रह सकती है, जो जनसंख्या वृद्धि से थोड़ी अधिक ही होगी। यह ठहराव की स्थिति पैदा करेगा, खासकर युवा आबादी वाले देश में जहां यह विस्फोटक साबित हो सकती है।
रिपोर्ट जोर देती है कि आने वाले पांच साल युवा आबादी को डेमोग्राफिक डिविडेंड बनाएंगे या अस्थिरता का कारण। रोजगार के अभाव में विदेश पलायन बढ़ेगा, रेमिटेंस अस्थायी सहारा देंगी लेकिन ब्रेन ड्रेन क्षमता को खोखला करेगा।
आईएमएफ जैसे स्थिरीकरण प्रयास क्षणिक राहत हैं, स्थायी वृद्धि के लिए निर्णायक कदम जरूरी। नौकरियां अनौपचारिक क्षेत्रों में सीमित रहेंगी। हालांकि, कर सुधार, डिजिटल राजस्व संग्रह और निर्यात नीतियां 2029-30 तक 4-5 प्रतिशत विकास संभव बनाएंगी।
दशकों की विफलता—कर आधार न बढ़ाना, एलीट पकड़—देश को हर बाहरी झटके से संकट में डालती है। शिक्षा पर जीडीपी का 1.9 प्रतिशत खर्च अपर्याप्त, 2.62 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर, पाठ्यक्रम में आधुनिक कौशलों की कमी।
64 प्रतिशत स्नातकों को कौशल अभाव से नौकरी नहीं मिलती, युवा बेरोजगारी 31 प्रतिशत। 2026-31 में कर्ज, महंगाई, गरीबी तय करेंगे भविष्य। सुधार न हुए तो घरेलू बजट पर दबाव बरकरार रहेगा।