
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 29 हजार से अधिक पेड़ काटे जाने का मामला संसद में गरमाया। विपक्ष ने इसे शहर के फेफड़ों पर हमला बताया, जबकि सरकार का दावा है कि ये पेड़ स्वास्थ्य के लिए खतरा थे।
गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने नेशनल असेंबली में बताया कि इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी से 29,115 पेड़ हटाए गए। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही इससे कहीं ज्यादा पेड़ लगाए जाएंगे। डॉन अखबार की रिपोर्ट के बाद यह विवाद भड़का।
पीटीआई के अली मुहम्मद खान ने तीखा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि 50-60 साल पुराने पेड़ भी क्यों काटे गए, जबकि सिर्फ पेपर मलबेरी को निशाना बनाया जाना था। ‘ये इस्लामाबाद के फेफड़े थे,’ उन्होंने जोर देकर कहा और जनता से परामर्श न करने पर सवाल उठाए।
पीपीपी की शाजिया मरी ने भी चिंता जताई। विभिन्न इलाकों से हजारों पेड़ कटने की खबरें आ रही हैं। उन्होंने पारदर्शिता की मांग की और मामले को जलवायु परिवर्तन समिति के पास भेजने का सुझाव दिया।
जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. मुसादिक मलिक ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के 2023-2025 के आदेशों पर पेपर मलबेरी पेड़ काटे गए, जो एलर्जी और अस्पतालों में मरीजों की बढ़ोतरी का कारण थे। हर कटे पेड़ के बदले तीन देशी पेड़ लगेंगे, जिससे हरी पट्टी मजबूत होगी।
सोशल मीडिया पर जनता का गुस्सा फूट पड़ा। यह घटना पाकिस्तान में पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के बीच टकराव को उजागर करती है। क्या नया वनरोपण इस नुकसान की भरपाई कर पाएगा?