
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से 29,115 पेड़ हटाने का मामला संसद में गरमाया। विपक्ष ने इसे शहर के फेफड़ों पर हमला बताया, जबकि सरकार के मंत्री इसे स्वास्थ्य सुरक्षा का कदम बता रहे हैं।
गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने नेशनल असेंबली को बताया कि ये पेड़ मुख्य रूप से पेपर मलबेरी प्रजाति के थे, जो एलर्जी और सांस की बीमारियों का कारण बन रहे थे। उन्होंने आश्वासन दिया कि इनकी जगह आने वाले महीनों में और अधिक पेड़ लगाए जाएंगे।
पीटीआई के अली मुहम्मद खान ने तीखा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि 50-60 साल पुराने ये पेड़ इस्लामाबाद की हवा शुद्ध करने वाले थे। अगर सिर्फ हानिकारक प्रजाति को निशाना बनाना था, तो परिपक्व पेड़ क्यों काटे गए? उन्होंने जनता से परामर्श न करने पर सवाल उठाए।
पीपीपी की शाजिया मरी ने भी विभिन्न इलाकों में हजारों पेड़ कटने की रिपोर्ट्स का हवाला दिया। उन्होंने पारदर्शिता की मांग की और सुझाया कि मामला जलवायु परिवर्तन समिति को सौंपा जाए।
जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. मुसादिक मलिक ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के 2023-2025 के आदेशों पर कार्रवाई हुई। हर कटे पेड़ के बदले तीन नए लगेंगे, जिसमें देशी प्रजातियों को प्राथमिकता मिलेगी ताकि हरियाली बढ़े।
सोशल मीडिया पर जनता का गुस्सा भड़का है। ये घटना पाकिस्तान में स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच संतुलन की चुनौती को उजागर करती है।