
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की संघीय अदालत ने एक गंभीर मामले में पुलिस को सख्त निर्देश जारी किए हैं। 13 वर्षीय ईसाई लड़की मरिया शाहबाज का अपहरण कर जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया और 30 वर्षीय मुस्लिम युवक से शादी कर दी गई। अदालत ने पुलिस को उसे तलाशकर न्यायालय में हाजिर करने का आदेश दिया है।
संघीय संवैधानिक न्यायालय की बेंच ने मरिया और शह्रयार अहमद को पेश करने का फैसला सुनाया। वकील राना अब्दुल हमीद के अनुसार, पिछले साल 29 जुलाई को यह अपहरण हुआ था। निचली अदालतों ने परिवार की याचिकाएं खारिज कर दीं, जिसके बाद यह मामला ऊपरी अदालत पहुंचा।
हमीद ने कहा कि लड़की नाबालिग है और धर्मांतरण व शादी के बहाने उसके साथ दुष्कर्म हो रहा है। लाहौर पुलिस पर आरोपी से सांठगांठ का आरोप लगाया गया, जिससे मजिस्ट्रेट ने शिकायत ठुकरा दी।
मरिया को जबरन बयान दिलवाया गया कि उसने स्वेच्छा से इस्लाम अपनाया और शादी की। लेकिन आधिकारिक कागजात साबित करते हैं कि वह 16 वर्ष से कम उम्र की है, जो प्रांतीय कानूनों के विरुद्ध है।
पिता शाहबाज मसीह ने बताया कि पड़ोसी ने घर के पास दुकान जाते वक्त बेटी को उठा लिया। नवाब टाउन थाने में एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन पुलिस ने मजिस्ट्रेट के सामने उसके बयान का हवाला दिया।
मानवाधिकार कार्यकर्ता बताते हैं कि पाकिस्तान में 10 साल की मासूमों का अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और बलात्कार का सिलसिला आम है। अदालतें उम्र के प्रमाण नजरअंदाज कर देती हैं।
धार्मिक अल्पसंख्यक झूठे ब्लास्फेमी केस, हिंसा, हत्याओं, जमीन कब्जे, जबरन धर्मांतरण और मंदिरों पर हमलों से जूझ रहे हैं। यह फैसला उम्मीद जगाता है, लेकिन व्यापक सुधार जरूरी हैं।