
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में ईशनिंदा कानूनों का खुला दुरुपयोग होने से सैकड़ों परिवार डर के माहौल में जीने को मजबूर हैं। एक ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जबरन वसूली से इनकार करने वालों को फंसाने के लिए संगठित गिरोह झूठे केस ठोक रहे हैं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अनुसार, हाल के वर्षों में 450 से ज्यादा लोग, ज्यादातर पुरुष, इन झूठे मामलों का शिकार बने। इनमें 10 ईसाई शामिल थे, जिनमें से कम से कम पांच हिरासत में मारे गए।
जुलाई में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने 101 प्रभावित परिवारों की याचिका पर सुनवाई कर केंद्र सरकार को जांच आयोग बनाने का आदेश दिया था। लेकिन अपीलीय अदालत ने इसे रोक दिया।
रिपोर्ट में फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के साइबर क्राइम विंग के अफसरों पर भी झूठे आरोप गढ़ने का इल्जाम लगा।
लाहौर के 33 वर्षीय रिक्शा चालक आमिर शहजाद का मामला चर्चा में है। वे पार्सल लेने निकले तो लापता हो गए। चार दिन बाद एफआईए ने गिरफ्तारी की सूचना दी, आरोप फेसबुक पर ईशनिंदा पोस्ट का।
शहजाद की मां हर मंगलवार जेल जाती हैं। उन्होंने बताया कि जेल में कई कैदी इसी तरह फंसाए गए हैं। मानवाधिकार संगठन इन्हें ‘ईशनिंदा गिरोह’ कहते हैं, जो निजी फायदे के लिए युवाओं को टारगेट करते हैं।
यह दुरुपयोग पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है और कानूनी सुधार की मांग तेज हो रही है।