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पाकिस्तान की सेना बिकाऊ? गाजा मिशन पर $100 में सैनिक की कीमत!

इस्लामाबाद: पाकिस्तान की सेना एक बार फिर बड़े विवादों में घिर गई है। इस बार मामला देश की सेना की विश्वसनीयता पर गहरा सवाल उठाता है। हाल ही में एक चौंकाने वाली 'रेट कार्ड' की खबर सामने आई है, जिसमें...

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Lok Shaktiसंवाददाता (Reporter)
|विदेश|
November 5, 2025
पाकिस्तान की सेना बिकाऊ? गाजा मिशन पर $100 में सैनिक की कीमत!
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इस्लामाबाद: पाकिस्तान की सेना एक बार फिर बड़े विवादों में घिर गई है। इस बार मामला देश की सेना की विश्वसनीयता पर गहरा सवाल उठाता है। हाल ही में एक चौंकाने वाली 'रेट कार्ड' की खबर सामने आई है, जिसमें पाकिस्तानी सैनिकों के जीवन का सौदा पैसों में किया जा रहा है।

अधिकारियों और मीडिया में लीक हुई गोपनीय रिपोर्टों के अनुसार, सैनिकों के लिए अलग-अलग 'भाव' तय किए गए हैं। अगर कोई सैनिक ड्यूटी से बचना चाहता है तो उसे 8,000 पाकिस्तानी रुपये देने होंगे। युद्ध के मैदान से पीछे हटने के लिए 80,000 रुपये की राशि तय की गई है, जबकि जान जोखिम में डालने के लिए करीब 28 लाख रुपये का भुगतान ही काफी माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने गाजा में एक बड़े सैन्य तैनाती का प्रस्ताव रखा था। इस योजना का उद्देश्य हमास के लड़ाकों को निरस्त्र करना और क्षेत्र में स्थिरीकरण लाना था। इसमें लगभग 20,000 सैनिकों की टुकड़ी शामिल होनी थी, जिनका लक्ष्य इजरायली सेना से सीधे टकराव नहीं, बल्कि हथियार जब्त करना और निरस्त्रीकरण प्रक्रिया में मदद करना था।

मुनीर का इरादा पाकिस्तान की वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ाना और देश को एक जिम्मेदार सैन्य शक्ति के रूप में पेश करना था। हालांकि, इस प्रस्ताव का सेना के भीतर ही भारी विरोध हुआ। कई सैनिकों ने गाजा में लड़ने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि यह उनका संघर्ष नहीं है। साथ ही, मुसलमानों के खिलाफ लड़ने को लेकर भी नैतिक आपत्तियां उठाई गईं।

सैनिकों के इस विरोध को शांत करने के लिए, मुनीर ने कथित तौर पर प्रति सैनिक $10,000 (लगभग 28 लाख रुपये) की पेशकश की। लेकिन, इस प्रस्ताव को एक बड़ा राजनयिक झटका लगा जब इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मध्यस्थों के माध्यम से स्पष्ट कर दिया कि किसी भी पाकिस्तानी सैनिक को $100 (लगभग 28,000 रुपये) से अधिक का भुगतान नहीं किया जाएगा।

यह प्रस्ताव इस्लामाबाद के लिए अपमानजनक था, खासकर तब जब इजरायल ने अन्य मुस्लिम देशों को इससे कहीं अधिक की पेशकश की थी। पहले से ही अक्षमता, भ्रष्टाचार और भगोड़ेपन के आरोपों से जूझ रही पाकिस्तानी सेना के लिए यह $100 की सीमा एक इंसल्ट से कम नहीं थी।

मुनीर एक दोहरे संकट में फंस गए। इजरायली शर्तों को स्वीकार करने का मतलब था घर पर राजनीतिक विरोध का सामना करना, जबकि इसे अस्वीकार करने का मतलब था वैश्विक मंच से पीछे हटना। उनकी गाजा योजना ध्वस्त होने लगी।

इजरायल के इस कदम के पीछे 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का वह घाव था, जब पाकिस्तान के 93,000 सैनिकों ने भारत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। यह घटना आज भी पाकिस्तानी सेना को सताती है। इसके अलावा, सेना घरेलू मोर्चे पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे विद्रोहियों से लड़ने में भी लगातार नुकसान उठा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल का प्रस्ताव पैसे के बारे में नहीं था, बल्कि यह पाकिस्तान की सैन्य क्षमता का एक ठंडा आकलन था। $100 की कीमत सिर्फ यह दर्शाती है कि पाकिस्तानी सेना वास्तव में कितना कम योगदान दे सकती है।

जो योजना वैश्विक पहचान के लिए बनाई गई थी, वह उपहास का पात्र बन गई। गाजा मिशन एक कूटनीतिक आपदा साबित हुआ। लीक हुआ 'रेट कार्ड' उस सेना के लिए एक कड़वी सच्चाई बन गया है जिसने न केवल अपना सम्मान खो दिया है, बल्कि अपनी कीमत भी तय करवा ली है।

इस्लामाबाद के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। पाकिस्तान सेना का कहना है कि परिचालन निर्णय वर्गीकृत होते हैं और कर्मियों का कल्याण प्राथमिकता है। इजरायली अधिकारियों ने भुगतान सीमा की पुष्टि नहीं की है। इस बीच, मध्यस्थों ने हाल के हफ्तों में तनावपूर्ण कूटनीतिक बातचीत का उल्लेख किया है।

मुनीर का वीरता बेचने का प्रयास उनकी अपनी सेना के भीतर की दरारों को उजागर कर गया है। जैसे-जैसे विदेशी राजधानियों में हँसी की गूँज तेज हो रही है, एक सवाल बना हुआ है: डॉलर में या गरिमा में, पाकिस्तान की सेना की असली कीमत क्या है?

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