
नाइजीरिया के लिए शुक्रवार का दिन खुशी वाला रहा जब यूरोपीय संघ ने इसे हाई-रिस्क एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग सूची से हटा दिया। वित्तीय सुधारों की यह सराहना आर्थिक मोर्चे पर नई उम्मीद जगाती है, लेकिन उसी समय अमेरिका के साथ रिश्तों में आई खटास चिंता का विषय बनी हुई है। यह स्थिति नाइजीरिया की वैश्विक स्थिति को परिभाषित कर रही है।
ईयू का फैसला नाइजीरिया के मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग रोकने के प्रयासों को मान्यता देता है। इससे यूरोप के साथ निवेश और व्यापार के द्वार खुल सकते हैं, जो अफ्रीकी अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित हो सकता है।
दूसरी ओर, अमेरिका के साथ मतभेद गहरे होते जा रहे हैं। 2025 के क्रिसमस पर अमेरिकी हमलों को नाइजीरिया ने गलतफहमी बताया, जबकि ट्रंप के बयानों ने रिश्तों को और नुकसान पहुंचाया। बोको हराम जैसे खतरों से निपटने के तरीकों पर वॉशिंगटन की आलोचना जारी है।
मानवाधिकार, चुनाव और सुरक्षा नीतियों पर उठे सवालों ने सैन्य सहायता को प्रभावित किया है। ईयू आर्थिक प्राथमिकताओं पर जोर देता है, वहीं अमेरिका राजनीतिक मूल्यों को। नाइजीरिया इस बीच विविध साझेदारियां मजबूत कर रहा है।
घरेलू स्तर पर ईयू की मुहर सरकार की छवि चमकाएगी, जबकि अमेरिकी दबाव को हस्तक्षेप कहा जाएगा। नतीजा? यूरोप से लाभ और अमेरिका से सबक। नाइजीरिया का यह रुख अफ्रीका की नई कूटनीति का प्रतीक है।