
ईरान में जारी आंदोलनों के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक नई उम्मीद जगाई है। कैबिनेट बैठक में उन्होंने कहा कि तेहरान की वर्तमान सरकार ढहते ही इजरायल और ईरान फिर से साझीदार बनकर शांति व समृद्धि के लिए कंधे से कंधा मिलाएंगे।
प्रदर्शनकारियों के समर्थन में नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि इजरायल ईरान के साहसी लोगों के साथ खड़ा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अत्याचार का अंत होने पर दोनों देश मिलकर जनकल्याणकारी परियोजनाएं चलाएंगे। ईरान भर में फैले विरोध के दौरान मौतों की संख्या बढ़ रही है, जो अर्थव्यवस्था की खराब हालत और दमनकारी नीतियों के खिलाफ है।
नेतन्याहू का यह बयान 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले के ऐतिहासिक रिश्तों को याद दिलाता है। उन्होंने ईरान को जल्द आजादी की कामना की और सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया।
इधर, ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कालीबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी का कड़ा जवाब दिया। संसद में अमेरिका-विरोधी नारों के बीच उन्होंने कहा कि इस्लामी गणराज्य पर हमला होने पर अमेरिकी सेनाएं और इजरायल निशाने पर होंगे।
कट्टरपंथी नेता कालीबाफ ने सुरक्षाबलों की तारीफ की और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान किया। उन्होंने इजरायल को कब्जे वाली जमीन करार देकर सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को वैध लक्ष्य बताया। यह घटनाक्रम मध्य पूर्व की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकता है।