
काठमांडू। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने 5 मार्च को हुए प्रतिनिधि सभा चुनावों में अपनी पार्टी को मिली करारी हार को स्वीकार कर लिया है। सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष ओली ने जनादेश का सम्मान करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि है।
पूर्वी नेपाल के झापा-5 क्षेत्र में, जो यूएमएल का गढ़ रहा है, काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह ने ओली को 68,348 वोटों से पटखनी दी। शाह को मिले वोट नेपाल के संसदीय इतिहास के सर्वाधिक हैं, जबकि ओली को केवल 18,734 वोट प्राप्त हुए।
275 सदस्यीय सदन में एफपीटीपी प्रणाली से 165 में से यूएमएल को महज नौ सीटें मिलीं। दूसरी ओर, साढ़े तीन साल पुरानी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने 125 सीटें जीतीं। आरएसपी के अध्यक्ष रबी लामिछाने और शाह के नेतृत्व में पार्टी ने प्रोपोर्शनल वोट में भी बढ़त हासिल की।
ओली ने फेसबुक पर लिखा, ‘हमने अपेक्षित परिणाम नहीं पाए। लेकिन जनसेवा के प्रति हमारी निष्ठा अटल है। पार्टी जनता के बीच रहेगी और विश्वास मजबूत करेगी।’ पारंपरिक दलों की हार जनाक्रोश का परिणाम है, जो 2025 के जेन-जी आंदोलन में फूटा।
उस हिंसक प्रदर्शन में 77 मौतें हुईं और 84 अरब नेपाली रुपये का नुकसान। ओली सरकार गिरी, सुशीला कार्की की अंतरिम सरकार ने चुनाव कराए, जिससे आरएसपी सत्ता के करीब पहुंची। अब नेपाल में नई राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं।