
काठमांडू। राष्ट्रीय एकता दिवस की पूर्व संध्या पर नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह ने राजनीतिक नेताओं पर तेज तीर चलाए। उन्होंने देश की विदेश नीति को असंतुलित बताते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय हितों को गंभीर खतरे में डाल रही है। पृथ्वी नारायण शाह की 304वीं जयंती पर जारी वीडियो संदेश में पूर्व सम्राट ने नेतृत्व की भू-राजनीतिक समझ की कमी पर सवाल उठाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि इस गलत रवैये से मित्र देशों का भरोसा खत्म हो रहा है। ‘असंतुलित नीतियां राष्ट्रीय हितों को चोट पहुंचा रही हैं, ऐसे में पृथ्वी नारायण शाह के उपदेशों का महत्व बढ़ गया है,’ उन्होंने कहा, बिना विस्तार दिए।
नेपाल को ‘शांति की ढाल’ अपनाने की सलाह देते हुए उन्होंने बाहरी सुरक्षा छत्रों पर निर्भरता ठुकराई। युवाओं की निराशा, पलायन और पूंजी का बहिर्गमन चिंता का विषय बताया। यदि इसे रोका न गया तो देश असफल राष्ट्र बन सकता है, यह कहकर उन्होंने पीड़ा जताई।
जेन-जी आंदोलन का अप्रत्यक्ष जिक्र करते हुए कहा कि युवा आकांक्षाओं की अनदेखी विद्रोह को जन्म देती है। इन प्रदर्शनों में 77 मौतें और 84 अरब रुपये का नुकसान हुआ, जिससे ओली सरकार गिरी और कार्की प्रशासन आया।
दो दशक पूर्व राजमहल त्यागने का जिक्र कर कहा कि शांति-स्थिरता के वादों के बावजूद संकट बरकरार हैं। राष्ट्र निर्माण से अब अस्तित्व की रक्षा का दौर आ गया है। नेतृत्व को जागना होगा।