
झापा के गलियारों में रैप की धुनें राजनीतिक उफान ला रही हैं। 35 वर्षीय बालेन शाह, पूर्व रैपर और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के उभरते चेहरे को भविष्य का प्रधानमंत्री मानते हुए रैप कलाकार एकजुट हो गए हैं। पांच मार्च को होने वाले राष्ट्रिय चुनावों से ठीक पहले यह माहौल जोर पकड़ रहा है।
पिछले साल केपी शर्मा ओली सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर लगाए गए बैन के खिलाफ जेन-जी प्रदर्शनों ने आग लगाई थी। रैपर्स ने अपनी तीखी प्रस्तुतियों से सड़कों पर लोगों को उत्साहित किया, आवाज दबाने की कोशिशों का मुकाबला किया। बालेन शाह भी इनमें अग्रणी थे।
झापा-5 क्षेत्र से लड़ रहे बालेन के समर्थक सिर्फ पार्टी कार्यकर्ता नहीं, बल्कि युवा प्रेरणा स्रोत के भक्त हैं। दमक के रहने वाले 34 वर्षीय राजेश भंडारी और 24 वर्षीय प्रभात बस्नेत जैसे रैपर-सोशल मीडिया एक्टिविस्ट इसकी मिसाल हैं। झापा भारत सीमा से सटा पूर्वी जिला है।
15 साल से रैप पर काम कर रहे भंडारी सैनिटरी हार्डवेयर का कारोबार चलाते हैं। ‘हमारा संगीत विरोध का हथियार और लोगों को जोड़ने का पुल है,’ वे कहते हैं। बालेन को 15 साल से जानते हैं और मानते हैं कि दशकों की लूट-खसोट के बाद वे ही सच्चे नेता हैं।
दो हफ्ते पहले उन्होंने बालेन के गानों का एल्बम जारी किया- एक श्रद्धांजलि। बचपन में लिखे रैप में उन्होंने सत्ता से कष्टों का हिसाब मांगा था। नेपाल से बाहर सिर्फ सिलीगुड़ी गए, युवाओं के अधूरे सपनों पर अफसोस जताया।
प्रभात बस्नेत, अभियान स्वयंसेवकों के कोऑर्डिनेटर, कहते हैं रैप सरल और प्रेरक है। प्रदर्शनों में हमने संगठन और सुरक्षा सुनिश्चित की, हिंसा नहीं भड़काई। बालेन के विकास प्लान और काठमांडू मेयर के रूप में सफ लाई ने भरोसा जगाया।
भंडारी ने बालेन के तीन साल के प्रशासन की तारीफ की- शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाया। रैपर्स की यह एकता नेपाल की सियासत में नई हवा भर सकती है। चुनाव बताएंगे, क्या धुनें सत्ता तक पहुंचेंगी?