
नेपाल में 5 मार्च को निर्धारित आम चुनावों से ठीक पहले राजनीतिक दल और उम्मीदवार सोशल मीडिया को अपना सबसे मजबूत हथियार बना चुके हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, थ्रेड्स और मैसेंजर जैसे प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापनों का खर्च तेजी से बढ़ रहा है, जो चुनावी रणनीतियों में डिजिटल बदलाव को दर्शाता है।
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 20 अक्टूबर से 11 जनवरी तक राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने फेसबुक विज्ञापनों में सबसे अधिक निवेश किया। 15 जनवरी को उज्यालो नेपाल के साथ विलय के बाद पार्टी ने अपने मुख्य पेज, जेन-जी यूनाइटेड मूवमेंट और विभिन्न जिला इकाइयों के माध्यम से आक्रामक प्रचार किया।
गतिशील लोकतांत्रिक पार्टी भी शीर्ष पर रही, जिसके मुख्य पेज से तीन महीनों में 39 प्रायोजित पोस्ट जारी हुईं। रिपोर्ट बताती है कि पार्टियों का यह भारी खर्च पारदर्शिता और लक्षित प्रचार पर सवाल उठा रहा है।
राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के अध्यक्ष राजेश पोर्टेल की अगुवाई में, जिन्होंने जेन-जी आंदोलन में एक पैर गंवाया, पार्टी ने आधिकारिक पेज पर 1199 डॉलर खर्चे। ओखलढुंगा इकाई ने 240 डॉलर, जेन-जी पेज ने 427 डॉलर और पंचथर ने 100 डॉलर लगाए, कुल लगभग 2360 डॉलर।
तकनीकी जानकार डोवन का कहना है कि सोशल मीडिया ने चुनावी पहुंच को सुलभ बनाया है, लेकिन डिजिटल अभियानों में नैतिकता की कमी भी दिख रही है। गतिशील लोकतांत्रिक पार्टी ने 39 विज्ञापनों पर 1116 डॉलर खर्च कर दूसरा स्थान हासिल किया।
उज्यालो नेपाल के संस्थापक गुरुंग ने 11 विज्ञापनों पर 489 डॉलर लगाए, जो काठमांडू-5 से फिर उम्मीदवार हैं। पिछले चुनावों में उन्होंने सोशल मीडिया पर 5968 डॉलर खर्च कर 2761 वोट हासिल किए थे।
‘सिटिजंस फॉर वोटिंग नेपाल’ पेज ने मतदाता जागरूकता विज्ञापन पर 417 डॉलर खर्चे। नेपाली कांग्रेस के सुनील शर्मा ने 289 डॉलर और आरएसपी कवरेज युगेश ने 230 डॉलर लगाए। झलनाथ खनाल और राजेंद्र लिंगदेन के लिए भी विज्ञापन चले।
यह डिजिटल उन्माद नेपाल की राजनीति को नया आयाम दे रहा है, लेकिन खर्च पर नियंत्रण जरूरी है ताकि लोकतंत्र मजबूत रहे।