
काठमांडू में गुरुवार को संसदीय चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गए, लेकिन मतदाता टर्नआउट ने सभी को चौंका दिया। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार लगभग 60 प्रतिशत वोटिंग हुई, जो 1991 के आम चुनावों के बाद सबसे कम हो सकती है। जेन-जी आंदोलन के बाद पहली बार हो रहे इस मतदान में युवाओं से बड़ी उम्मीदें बंधी थीं, मगर उदासीनता हावी रही।
कार्यवाहक मुख्य निर्वाचन आयुक्त राम प्रसाद भंडारी ने प्रेस वार्ता में बताया कि देशभर से आ रही जानकारियों के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है। 2022 के चुनावों में 61.41 प्रतिशत मतदान हुआ था। उन्होंने कहा कि विस्तृत आंकड़े एकत्रित हो रहे हैं और कुछ मतदान केंद्रों पर कतार में खड़े वोटरों के कारण प्रक्रिया जारी है।
राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के मुताबिक, छिटपुट घटनाओं को छोड़कर चुनाव सुचारू चला। बैलेट बॉक्स सुरक्षित पहुंचते ही मतगणना शुरू होगी। 15 दूरस्थ जिलों से हेलीकॉप्टर द्वारा बक्से लाए जाएंगे।
देश में 18.9 मिलियन पंजीकृत मतदाता हैं, लेकिन कुछ स्टेशनों पर सरकार के प्रति नाराजगी से बहिष्कार देखा गया। भंडारी ने स्पष्ट किया कि यह आयोग पर नहीं, बल्कि सरकार पर असंतोष है। पिछले सितंबर के जेन-जी आंदोलन ने पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली की सरकार गिराई, जिसके बाद संसद भंग कर दो साल पहले चुनाव कराए गए।
कुल मतदाताओं में दो-तिहाई से अधिक नए जेन-जी समूह के हैं, जो 2026 तक युवा सहभागिता में उछाल दिखाता है। एफपीटीपी में 3406 और अनुपातिक प्रणाली में 3135 उम्मीदवार मैदान में हैं। नतीजों का इंतजार है, जो राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।