
काठमांडू। नेपाली कांग्रेस के विभाजन के महज दो दिन बाद चुनाव आयोग ने गगन थापा के नेतृत्व वाली समिति को आधिकारिक रूप से मान्यता प्रदान कर दी। इस फैसले से थापा समर्थकों में उत्साह है तो शेरबहादुर देउबा गुट ने पूरे देश में आंदोलन की चेतावनी जारी की है।
कार्यवाहक मुख्य आयुक्त राम प्रसाद भंडारी की अगुवाई में आयोग ने विशेष महाधिवेशन से चुनी गई थापा की टीम के दावे को सही ठहराया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह निर्णय बहुमत से लिया गया, हालांकि एक आयुक्त ने विरोध दर्ज किया था।
आयोग ने तीन प्रमुख आधारों पर फैसला सुनाया। पहला, पार्टी संविधान में 40 प्रतिशत महाधिवेशन प्रतिनिधियों को विशेष अधिवेशन बुलाने का अधिकार है, जो यहां लागू हुआ। केंद्रीय कार्यकारिणी के टालमटोल के चलते महासचिव थापा और शर्मा द्वारा अधिवेशन वैध था। दूसरा, महाधिवेशन प्रतिनिधि सर्वोच्च हैं, उनके निर्णय बाध्यकारी। तीसरा, अधिवेशन की मांग पर कोई लिखित आपत्ति नहीं मिली।
थापा ने शुक्रवार शाम बयान जारी कर आयोग का स्वागत किया। उन्होंने कहा, ‘यह संविधान और कानून के अनुरूप फैसला है। हम आभारी हैं।’ सभी नेताओं से एकता का आह्वान करते हुए उन्होंने पार्टी को मजबूत बनाने का वादा किया और देउबा के प्रति सम्मान जताया।
देउबा गुट ने फैसले पर नाराजगी जताई और विरोध प्रदर्शन की घोषणा की। शनिवार सुबह ललितपुर के सनेपा स्थित मुख्यालय में केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है। आयोग ने कहा कि देउबा गुट नई पार्टी बना सकता है।
इससे राष्ट्रीय राजनीति में ध्रुवीकरण बढ़ेगा। मार्च चुनाव प्रभावित हो सकते हैं यदि कानूनी लड़ाई लड़ी गई। नेपाली कांग्रेस का यह संकट देश की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।