
नेपाल में 5 मार्च को होने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। निर्वाचन आयोग की आचार संहिता लागू करने के लगभग एक माह बाद जारी रिपोर्ट ने विवाद खड़ा कर दिया है। चुनाव पर्यवेक्षण समिति (एनईओसी) ने आयोग को कड़ी चेतावनी जारी की है कि उल्लंघनों पर तत्काल कार्रवाई हो, वरना सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
19 जनवरी को आचार संहिता लागू की गई थी, जिसके लिए राजनीतिक दलों और जनता से विस्तृत परामर्श हुए थे। उसके बाद सैकड़ों शिकायतें दर्ज हुईं। आयोग ने 79 मामलों में केवल स्पष्टीकरण मांगे, लेकिन कोई सजा नहीं दी। नौ संस्थाओं और व्यक्तियों को दोबारा नोटिस जारी हुए।
काठमांडू पोस्ट के अनुसार, धाडिंग-1 की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की प्रत्याशी आशिका तमांग पर स्कूल में प्रचार और बच्चों के इस्तेमाल का आरोप लगा। दोनों बार उनकी सफाई संतोषजनक नहीं पाई गई, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एनईओसी अध्यक्ष गोपाल कृष्ण सिवाकोटी ने कहा, ‘उल्लंघन कम नहीं हुए, बस सोशल मीडिया पर चले गए हैं, जो ज्यादा घातक हैं। नुकसान के बाद कार्रवाई बेकार है। आयोग को अब सख्त कदम उठाने होंगे।’
एनईओसी प्रमुख कृष्ण सुबेदी ने जोर देकर कहा कि घटनाओं में कमी कार्रवाई न करने का बहाना नहीं। कुछ दिनों में अगर सुधार न हुआ तो अदालत जाएंगे।
चुनाव नजदीक आते ही यह टकराव लोकतंत्र की मजबूती पर सवाल उठा रहा है। आयोग की अगली चालें तय करेंगी कि प्रक्रिया कितनी स्वच्छ रहेगी।