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पाकिस्तान में मुनीर की बढ़ती ताकत: शहबाज सरकार ने दी खतरनाक शक्तियाँ

पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है जिस पर विपक्षी दलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। सरकार ने आतंकवाद विरोधी संशोधन विधेयक पारित किया है, जिसके तहत सेना और...

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Lok Shaktiसंवाददाता (Reporter)
|विदेश|
August 21, 2025
पाकिस्तान में मुनीर की बढ़ती ताकत: शहबाज सरकार ने दी खतरनाक शक्तियाँ
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पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है जिस पर विपक्षी दलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। सरकार ने आतंकवाद विरोधी संशोधन विधेयक पारित किया है, जिसके तहत सेना और सुरक्षा एजेंसियों को किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए तीन महीने तक हिरासत में रखने का अधिकार मिल गया है। आलोचकों का मानना है कि यह कदम पाकिस्तान को फिर से तानाशाही की ओर ले जा रहा है, जो वर्तमान सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के लिए जनरल परवेज मुशर्रफ जैसा मार्ग प्रशस्त कर रहा है। नया संशोधन पुराना आतंकवाद विरोधी अधिनियम 2014 के एक प्रावधान को पुनर्जीवित करता है, जिसे 2016 में समाप्त कर दिया गया था। इस प्रावधान के तहत, किसी भी व्यक्ति को संदेह या खुफिया जानकारी के आधार पर निवारक हिरासत में रखा जा सकता है। गिरफ्तारी का आदेश सेना या अर्धसैनिक बल जारी कर सकते हैं, जिसके बाद एक संयुक्त जांच दल (JIT) मामले की जांच करेगा, जिसमें पुलिस, खुफिया एजेंसियां और सेना के अधिकारी शामिल होंगे। यह प्रावधान तीन साल तक लागू रहेगा, जिसे संसद आगे बढ़ा सकती है। विपक्ष और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस कानून को मानवाधिकारों पर हमला बताया है। उनका कहना है कि यह आतंकवाद से लड़ने के बजाय सरकार के विरोधियों को दबाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार का तर्क है कि यह कानून विशेष परिस्थितियों में ही इस्तेमाल होगा, और गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। मानवाधिकार संगठनों ने सेना और एजेंसियों के प्रभुत्व वाले देश में इन शर्तों के पालन पर सवाल उठाया है। 1999 में, परवेज मुशर्रफ ने तख्तापलट कर निर्वाचित सरकार को गिरा दिया था और तानाशाही स्थापित की थी। आलोचकों का कहना है कि नया कानून आसिम मुनीर को और अधिक शक्तिशाली बना देगा, जिसका असली उद्देश्य आतंकवाद से लड़ना नहीं बल्कि सत्ता पर पकड़ मजबूत करना है।

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