
पेरिस। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूरोप को वैश्विक व्यवस्था में हो रहे उथल-पुथल के बीच सतर्क रहने की सलाह दी है। प्रमुख यूरोपीय अखबारों को दिए साक्षात्कार में उन्होंने जोर देकर कहा कि अब अमेरिका और चीन जैसी शक्तियों के आगे झुकना बंद करना होगा। बल्कि पूरे महाद्वीप को एकजुट होकर इन चुनौतियों का डटकर मुकाबला करने की जरूरत है।
एल पैस, सुडडोयचे जाइटुंग, फाइनेंशियल टाइम्स और ले मॉन्ड जैसे मीडिया आउटलेट्स से बातचीत में मैक्रों ने चेताया कि ‘यूरोप को जागना होगा, वरना बह जाएगा।’ उन्होंने वर्तमान दौर को ‘गहन भू-राजनीतिक उन्माद’ करार दिया, जो व्यापार और रक्षा दोनों क्षेत्रों को गहरा आघात पहुंचा रहा है।
मैक्रों के अनुसार, जोखिमों को कम करना, निर्भरता घटाना और संकट का इंतजार किए बगैर स्वयं निर्णय लेना ही सही रास्ता है। ‘अगर हम दर्शक बने रहे, तो गुलाम बन जाएंगे,’ उन्होंने ‘ग्रीनलैंड मोमेंट’ का जिक्र करते हुए कहा, जो अमेरिकी हितों के यूरोप से हटने का संकेत है।
यूरोप मजबूत है लेकिन प्रतिक्रिया में धीमा, यह मानते हुए मैक्रों ने महाद्वीप स्तर पर अधिक ‘साझा नेतृत्व’ की वकालत की। यूक्रेन के लिए फ्रांस-ब्रिटेन के नेतृत्व वाला ‘कोएलिशन ऑफ द विलिंग’ इसका बेहतरीन उदाहरण है, जिसने यूरोप को स्वतंत्र सुरक्षा गठबंधन बनाने की ताकत दी।
हैरानी की बात यह कि मैक्रों ने रूस से सीधी कूटनीतिक बातचीत फिर शुरू करने का सुझाव दोहराया। ‘बिना नासमझी के, यूक्रेन पर दबाव डाले या तीसरे पक्ष पर निर्भर हुए,’ उन्होंने कहा। ‘हमारे हितों की रक्षा हमारा दायित्व है, अमेरिका को सौंपने का नहीं।’
मैक्रों का यह बयान यूरोप के लिए एक बड़ा संदेश है कि बदलते विश्व में एकता और साहस ही सफलता की कुंजी हैं।