
वाशिंगटन। वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने 16 जनवरी को व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक भेंट किया। इस निजी भोजन सत्र के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने इसे दोनों देशों की स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक कड़ी बताया।
मचाडो ने कहा, ‘मैंने अमेरिकी राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार का पदक दिया।’ उन्होंने 200 साल पुरानी घटना का जिक्र किया जब फ्रांसीसी जनरल लाफिएट ने सिमोन बोलिवर को जॉर्ज वाशिंगटन की तस्वीर वाला पदक दिया था। ‘दो शताब्दी बाद बोलिवर के लोग इसे वाशिंगटन के वारिस को लौटा रहे हैं – इस बार नोबेल के रूप में, जो हमारी आजादी में उनके योगदान का सम्मान है।’
व्हाइट हाउस के निजी डाइनिंग रूम में हुई यह पहली आमने-सामने मुलाकात थी। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने पहले बताया था कि ट्रंप इस बातचीत को सकारात्मक मानते हैं। उन्होंने मचाडो को वेनेजुएला जनता की साहसी आवाज करार दिया और कहा कि राष्ट्रपति वहां की जमीनी स्थिति जानना चाहते हैं।
लेविट ने अमेरिका की अंतरिम नेतृत्व से अच्छे संबंधों का उल्लेख किया, जिसमें 500 मिलियन डॉलर का ऊर्जा समझौता और पांच अमेरिकियों समेत कैदियों की रिहाई शामिल है। हालांकि, नॉर्वे नोबेल संस्थान के नियमों के अनुसार पदक एक बार दिया गया तो लौटाया या साझा नहीं किया जा सकता।
ट्रंप ने हाल ही में मचाडो के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे, कहा था कि उनके पास पर्याप्त समर्थन नहीं। वहीं अंतरिम नेता डेल्सी रोड्रिग्ज की प्रशंसा की। 11 माह छिपने के बाद दिसंबर में नॉर्वे में पुरस्कार लेने पर मचाडो सार्वजनिक हुईं।
यह घटना अमेरिका-वेनेजुएला संबंधों को नई दिशा दे सकती है, जहां मदुरो शासन पर दबाव बढ़ सकता है। मचाडो का कदम लोकतंत्र समर्थकों के लिए प्रेरणा बनेगा।
