
वॉशिंगटन। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा का भारत दौरा वैश्विक दक्षिण की दो प्रमुख लोकतंत्रों के बीच संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकेत दे रहा है। एआई इम्पैक्ट समिट से शुरू होकर पूर्ण आधिकारिक यात्रा में बदलने वाला यह दौरा आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने की दिशा में सोची-समझी पहल है।
ओआरएफ अमेरिका के वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ. अनित मुखर्जी ने विशेष बातचीत में कहा कि यह यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले साल ब्रिक्स समिट और स्टेट विजिट के जवाब में लूला के साथ 14 कैबिनेट मंत्री और 150 कारोबारी नेता साथ हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि संबंध अब जी20-ब्रिक्स से आगे बढ़कर व्यापार, निवेश, उत्पादन और सेवाओं तक फैलेंगे।
ऐतिहासिक रूप से दोनों देशों के रिश्ते मजबूत रहे, लेकिन लूला के 2001 के विजन ने भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका को एकजुट किया, जिससे आईबीएसए और ब्रिक्स बने। आज दोनों तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं हैं, युवा आबादी और तकनीकी क्षमता से लैस। ब्राजील कृषि का दमदार केंद्र है, एम्ब्रेयर विश्व का तीसरा बड़ा विमान निर्माता। बजाज-महिंद्रा ने वहां फैक्टरियां खोलीं, टीसीएस-इंफोसिस का बाजार मजबूत।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर नया क्षेत्र है। भारत का यूपीआई और ब्राजील का पिक्स मिलकर प्रतिदिन 10 अरब ट्रांजैक्शन करते हैं, जो मास्टरकार्ड-वीजा के बराबर। ब्राजील में 4 हजार गैर-निवासी भारतीय बढ़ रहे हैं, योग-आयुर्वेद लोकप्रिय। ब्रिक्स-जी20 में विकास वित्त, व्यापार सुधार पर समन्वय। पिछले दशक में कृषि, ऊर्जा, ऑटो, फार्मा, आईटी व्यापार उछाला। यह दौरा नई शुरुआत का वादा करता है।