scorecardresearch
LokShakti Logo
मुख्य पृष्ठविदेशट्रंप के रूसी तेल बंदी दावे को क्रेमलिन ने किया खारिज, भारत ऊर्जा में स्वतंत्र

ट्रंप के रूसी तेल बंदी दावे को क्रेमलिन ने किया खारिज, भारत ऊर्जा में स्वतंत्र

मॉस्को। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को क्रेमलिन ने सिरे से नकार दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने व्यापार समझौते के तहत रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है। क्रेमलिन प्रवक्ता...

Lok Shakti
Lok Shaktiसंवाददाता (Reporter)
|विदेश|
February 4, 2026
ट्रंप के रूसी तेल बंदी दावे को क्रेमलिन ने किया खारिज, भारत ऊर्जा में स्वतंत्र
--- Advertisement ---
Jharkhand Banner Advertisement

मॉस्को। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को क्रेमलिन ने सिरे से नकार दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने व्यापार समझौते के तहत रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है। क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इसमें कुछ भी नया नहीं है और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी भी देश से तेल खरीदने को स्वतंत्र है।

हाल ही में भारत-अमेरिका व्यापार सौदे के बाद ट्रंप ने दावा किया कि भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ 18 प्रतिशत तक कम करने के बदले भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद रोकने का वादा किया है। लेकिन पेसकोव ने कहा कि रूस को भारत की ओर से कोई ऐसी आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।

मीडिया से बातचीत में पेसकोव ने जोर देकर कहा, 'रूस भारत का एकमात्र तेल सप्लायर नहीं है। भारत हमेशा से कई देशों से पेट्रोलियम उत्पाद आयात करता रहा है।' उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के जानकारों के साथ अपनी सहमति जताई कि भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं दिख रहा।

विदेश मंत्रालय की मारिया जखारोवा ने भी हाइड्रोकार्बन व्यापार के पारस्परिक लाभों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय रिफाइनरियों को रूसी क्रूड के विशेष ग्रेड और मिश्रण की जरूरत है, जिसे अमेरिकी तेल तत्काल पूरा नहीं कर सकता। यह सहयोग वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिरता प्रदान करता है।

2022 में यूक्रेन संकट के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बना रहा। 2025 तक भारत के कुल क्रूड आयात का लगभग एक तिहाई हिस्सा रूस से आया, हालांकि हालिया महीनों में वैश्विक बाजार के बदलाव से आयात में कुछ कमी आई है।

पेसकोव ने दोहराया कि भारत की ऊर्जा नीति स्वतंत्र है और रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत बनी हुई है। कोई भी बदलाव बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और व्यावसायिक हितों से तय होगा। यह बयान अंतरराष्ट्रीय व्यापार की जटिलताओं को रेखांकित करता है।

--- Advertisement ---
--- Advertisement ---
--- Advertisement ---
Jharkhand Sidebar Advertisement 300x250