
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सुरक्षा स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने 2025 में यहां हुए लगातार आतंकी हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2025 में देशभर में 82 आतंकी घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें से अधिकांश खैबर पख्तूनख्वा और उसके पूर्व कबायली जिलों में हुईं। सितंबर में प्रांत में 45 हमले हुए, जिसमें 54 लोगों की मौत हो गई और 49 घायल हुए। इनमें 20 घटनाएं विलयित जिलों में थीं, जहां 21 मौतें दर्ज की गईं, जिसमें सुरक्षाकर्मी, आतंकी और नागरिक शामिल थे।
एचआरसीपी ने अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) के प्रदेश अध्यक्ष मियां इफ्तिखार हुसैन के हवाले से कहा कि प्रांत के शहरी इलाकों में भी उग्रवादी संगठन सक्रिय हैं, खासकर दाएश (आईएसआईएस) की मौजूदगी चिंताजनक है। क़ौमी वतन पार्टी (क्यूडब्ल्यूपी) के सिकंदर शेरपाओ ने जनवरी से अब तक 550 हिंसक घटनाओं का जिक्र किया, जिसमें विलयित जिलों में नकलची गिरोह और अपराधिक नेटवर्क भी शामिल हैं। वजीरिस्तान और बाजौर में स्थिति इतनी खराब है कि सिविल सेवक और पुलिसकर्मी शाम ढलते ही छिप जाते हैं।
आयोग ने जबरन गायब करने की प्रथा, राजनीतिक उत्पीड़न, पत्रकारों पर हमले और सेंसरशिप पर भी चिंता जताई। पीटीएम जैसे आंदोलनों और प्रगतिशील पार्टियों के खिलाफ कार्रवाई लोकतंत्र के लिए खतरा है। खैबर पख्तूनख्वा में कानून व्यवस्था सुधारने की तत्काल जरूरत है, वरना मानवाधिकारों का हनन बढ़ेगा।



