
ईरान की राजधानी तेहरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति की 47वीं वर्षगांठ से ठीक पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने देशवासियों से एकजुटता का संदेश दिया। टेलीविजन पर प्रसारित अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि राष्ट्र की असली ताकत मिसाइलों या हवाई जहाजों जैसे हथियारों में नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति और दुश्मन को मुंह तोड़ जवाब देने की क्षमता में है। उन्होंने जोर देकर कहा, ‘जब तक दुश्मन निराश न हो, राष्ट्र उत्पीड़न झेलता रहता है।’
यह बयान तब आया जब अमेरिका के मध्य पूर्व में सैन्य जमावड़े और लगातार धमकियों के बीच तनाव चरम पर है। खामेनेई ने सालाना मार्च को विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ सम्मानजनक प्रदर्शन बताया, जो शत्रुओं को पीछे हटने पर मजबूर करता है। बुधवार को देशभर में होने वाले जश्न के मद्देनजर उनका यह अपील राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का प्रयास है।
ओमान की मस्कट में शुक्रवार को हुई अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता के बावजूद अमेरिका के साथ तल्खी बनी हुई है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इसे ‘एक कदम आगे’ करार दिया, लेकिन वाशिंगटन की नई पाबंदियों की धमकी ने संशय पैदा कर दिया। जून 2025 के इजरायल-ईरान संघर्ष के बाद यह पहली उच्चस्तरीय बातचीत थी, जिसमें अमेरिका ने ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्रों पर हमले किए थे।
खामेनेई ने उम्मीद जताई कि इस वर्षगांठ से अन्य देश ईरानी जनता के प्रति सम्मान दिखाएंगे। 1979 की क्रांति ने अमेरिका समर्थित शाह मोहम्मद रजा पहलवी को सत्ता से हटा कर इस्लामी गणराज्य की स्थापना की। 1980 में दूतावास कब्जे के बाद दोनों देशों के संबंध टूट गए।
इसके बीच, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी मंगलवार को ओमान जाएंगे। विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि अगली वार्ता की तिथि और स्थान ओमान से तय होगा। पेजेशकियन ने जोर दिया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम एनपीटी के दायरे में है और वह जबरदस्ती स्वीकार नहीं करेगा।
खामेनेई का संदेश ईरान को मजबूत एकजुटता की याद दिलाता है, जो बाहरी दबावों के बीच कूटनीति और दृढ़ता का संतुलन बनाए रखने का प्रतीक है।